Category: हिंदी
नयी और पुरानी हिंदी शायरी का कलेक्शन, आप इन केटेगरी के बारे में पड़ सख्ते हो इनमे से कुछ है जैसे दर्द, प्यार, फ्रेंडशिप, गम, ज़िंदगी, तन्हाई और गम
पुराना साल सबसे हो रहा है दूर
पुराना साल सबसे हो रहा है दूर क्या करें यही है कुदरत का दस्तूर बीती यादो को सोचकर उदास ना होना तुम नए साल में…
View More पुराना साल सबसे हो रहा है दूरचुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो, सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो, कुछ यूँ चला है तेरे ‘इश्क’ का…
View More चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो
दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो, ख्वाब बनकर नींद चुराया न करो, बहुत चोट लगती है मेरे दिल को, तुम ख़्वाबों में आ…
View More दिल के सागर में लहरें उठाया ना करोएहसास के दामन में आंसू गिराकर देखो
एहसास के दामन में आंसू गिराकर देखो,प्यार कितना है आजमा कर देखो,तुम्हें भूल कर क्या होगी दिल की हालत,किसी आईने पे पत्थर गिराकर तो देखो
View More एहसास के दामन में आंसू गिराकर देखोकि तुझसे भी खूबसूरत हो सवेरा तेरा
फूलों की वादियों में हो बसेरा तेरा, सितारों के आँगन में हो घर तेरा, दुआ है एक दोस्त की एक दोस्त को, कि तुझसे भी…
View More कि तुझसे भी खूबसूरत हो सवेरा तेरातुम्हें धरती पर भेजकर वो कैसे जी पाया है
पलकों को जब-जब आपने झुकाया है, बस एक ही ख्याल दिल में आया है, कि जिस खुदा ने तुम्हें बनाया है, तुम्हें धरती पर भेजकर…
View More तुम्हें धरती पर भेजकर वो कैसे जी पाया हैसच तो ये है कि खुद चाँद आप जैसा है
इस प्यार का अंदाज़ कुछ ऐसा है, क्या बताये ये राज़ कैसा है, कौन कहता है कि आप चाँद जैसे हो, सच तो ये है…
View More सच तो ये है कि खुद चाँद आप जैसा हैदिल टूटेगा तो फरियाद करोगे तुम भी
दिल टूटेगा तो फरियाद करोगे तुम भी, हम न रहे तो हमने याद करोगे तुम भी, आज कहते हो हमारे पास वक़्त नहीं हैं, पर…
View More दिल टूटेगा तो फरियाद करोगे तुम भीपर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए
आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए, महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए, करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो, पर बहुत कुछ…
View More पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुएहमारी ज़िंदगी तो कब की बिखर गयी
हमारी ज़िंदगी तो कब की बिखर गयी, हसरते सारी दिल में ही मर गयी, जब से गयी है वो बैठ के डोली में, हमारी तो…
View More हमारी ज़िंदगी तो कब की बिखर गयी