Category: Mirza Ghalib

Mirza Ghalib Shayari in Hindi – इश्क़, दर्द और जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी… जिनके अल्फाज़ आज भी दिलों पर राज करते हैं Mirza Ghalib Shayari in Hindi Mirza Ghalib उर्दू शायरी की दुनिया का वो चमकता सितारा हैं जिनकी शायरी सदियों बाद भी लोगों...

मिर्ज़ा ग़ालिब का जीवन और विरासत एक व्यापक परिचय

मिर्ज़ा ग़ालिब का जीवन और विरासत एक व्यापक परिचय

मिर्ज़ा ग़ालिब का जीवन और विरासत: एक व्यापक परिचय मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू और फ़ारसी साहित्य के सबसे महान शायरों में से एक थे। उनकी शायरी में गहरी भावनाएँ, जीवन के दर्शन और प्रेम की...

सीमाब-पुश्त गर्मी-ए-आईना दे है हम

सीमाब-पुश्त गर्मी-ए-आईना दे है हम | Mirza Ghalib

सीमाब-पुश्त गर्मी-ए-आईना दे है हम | Mirza Ghalib सीमाब-पुश्त गर्मी-ए-आईना दे है हम हैराँ किए हुए हैं दिल-ए-बे-क़रार के आग़ोश-ए-गुल कुशूदा बरा-ए-विदा है ऐ अंदलीब चल कि चले दिन बहार के यूँ बाद-ए-ज़ब्त-ए-अश्क फिरूँ...

रौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की

रौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की | मिर्ज़ा ग़ालिब

रौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की | मिर्ज़ा ग़ालिब रौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की इतराए क्यूँ न ख़ाक सर-ए-रहगुज़ार की जब उस के देखने के लिए आएँ बादशाह लोगों में क्यूँ नुमूद न हो लाला-ज़ार...

काबे में जा रहा तो न दो ता'ना क्या कहें

काबे में जा रहा तो न दो ता’ना क्या कहें | मिर्ज़ा ग़ालिब

काबे में जा रहा तो न दो ता’ना क्या कहें | मिर्ज़ा ग़ालिब काबे में जा रहा तो न दो ता’ना क्या कहें भूला हूँ हक़्क़-ए-सोहबत-ए-अहल-ए-कुनिश्त को ताअ’त में ता रहे न मय-ओ-अंगबीं की...

फिर इस अंदाज़ से बहार आई

फिर इस अंदाज़ से बहार आई | मिर्ज़ा ग़ालिब

फिर इस अंदाज़ से बहार आई | मिर्ज़ा ग़ालिब फिर इस अंदाज़ से बहार आई कि हुए मेहर-ओ-मह तमाशाई देखो ऐ साकिनान-ए-ख़ित्ता-ए-ख़ाक इस को कहते हैं आलम-आराई कि ज़मीं हो गई है सर-ता-सर रू-कश-ए-सतह-ए-चर्ख़-ए-मीनाई...

नहीं कि मुझ को क़यामत का ए'तिक़ाद नहीं

नहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं | मिर्ज़ा ग़ालिब

नहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं | मिर्ज़ा ग़ालिब नहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं शब-ए-फ़िराक़ से रोज़-ए-जज़ा ज़ियाद नहीं कोई कहे कि शब-ए-मह में क्या बुराई है बला से...