koi ummid bar nahin aati | Mirza Ghalib koī ummīd bar nahīñ aatī koī sūrat nazar nahīñ aatī maut kā ek din muayyan…
View More koi ummid bar nahin aati | Mirza GhalibMonth: May 2023
kisi ko de ke dil koi nawa-sanj-e-fughan kyun ho | Mirza Ghalib
kisi ko de ke dil koi nawa-sanj-e-fughan kyun ho | Mirza Ghalib kisī ko de ke dil koī navā-sanj-e-fuġhāñ kyuuñ ho na ho jab dil…
View More kisi ko de ke dil koi nawa-sanj-e-fughan kyun ho | Mirza Ghalibरौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की | मिर्ज़ा ग़ालिब
रौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की | मिर्ज़ा ग़ालिब रौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की इतराए क्यूँ न ख़ाक सर-ए-रहगुज़ार की जब उस के देखने के लिए…
View More रौंदी हुई है कौकबा-ए-शहरयार की | मिर्ज़ा ग़ालिबकाबे में जा रहा तो न दो ता’ना क्या कहें | मिर्ज़ा ग़ालिब
काबे में जा रहा तो न दो ता’ना क्या कहें | मिर्ज़ा ग़ालिब काबे में जा रहा तो न दो ता’ना क्या कहें भूला हूँ…
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फिर इस अंदाज़ से बहार आई | मिर्ज़ा ग़ालिब फिर इस अंदाज़ से बहार आई कि हुए मेहर-ओ-मह तमाशाई देखो ऐ साकिनान-ए-ख़ित्ता-ए-ख़ाक इस को कहते…
View More फिर इस अंदाज़ से बहार आई | मिर्ज़ा ग़ालिबनहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं | मिर्ज़ा ग़ालिब
नहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं | मिर्ज़ा ग़ालिब नहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं शब-ए-फ़िराक़ से रोज़-ए-जज़ा ज़ियाद नहीं कोई…
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बहुत सही ग़म-ए-गीती शराब कम क्या है | मिर्ज़ा ग़ालिब बहुत सही ग़म-ए-गीती शराब कम क्या है ग़ुलाम-ए-साक़ी-ए-कौसर हूँ मुझ को ग़म क्या है तुम्हारी…
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क्यूँकर उस बुत से रखूँ जान अज़ीज़ | मिर्ज़ा ग़ालिब क्यूँकर उस बुत से रखूँ जान अज़ीज़ क्या नहीं है मुझे ईमान अज़ीज़ दिल…
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