यह तुफान भी थम जाएंगे और रास्ते की कांटे भी हट जाएंगे

यह तुफान भी थम जाएंगे और रास्ते की कांटे भी हट जाएंगेऐ मुसाफिर यूं ना थक कर बैठ तेरे हौसले सेयह कायनात के असूल भी…

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जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुतयादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश कोमहसूस…

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यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते होजब भी मन में आये क्यों रुला देते होनिगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़ये कैसी मोहब्बत हैं…

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जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो

तेरी बातों का असर
जो छाया है मेरे दिल पर

तेरी बातों का असरजो छाया है मेरे दिल परयक़ीनन मुझे तड़पाएगाअब ये रात भरसोचा भूल जाऊंगा तुझेअब करूँगा ना यादमगर दर्द ही मिला मुझे,तुझे भूल…

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जो छाया है मेरे दिल पर

निकल पड़ा हूँ उस रास्ते पे
जो कभी ख़त्म नहीं होता

निकल पड़ा हूँ उस रास्ते पेजो कभी ख़त्म नहीं होता रुक जाता उस वक़्त अगर तूने….एक बार भी रोका होता आते हैं आज भी वो…

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जो कभी ख़त्म नहीं होता

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुतयादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश कोमहसूस…

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यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

ज़हर को दूध समझ कर कैसे पिया जाये
दिल हो अगर ज़ख़्मी तो उसे कैसे सिया जाये

ज़हर को दूध समझ कर कैसे पिया जायेदिल हो अगर ज़ख़्मी तो उसे कैसे सिया जाये जब खुद पर ही यकीन नहीं रहा मुझेतो तुझ…

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दिल हो अगर ज़ख़्मी तो उसे कैसे सिया जाये

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते होजब भी मन में आये क्यों रुला देते होनिगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़ये कैसी मोहब्बत हैं…

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जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो