अब ना मैं हूँ

अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,अब भी बाकी…

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मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं

मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं,क्या इसी चीज़ को कहते हैं गुज़ारा होना।वो मेरे बाद भी खुश होगा किसी और के साथ,मीठे…

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