Category: Shayari

  • Top 10 Romantic Shayaris to Melt Your Loves Heart

    Top 10 Romantic Shayaris to Melt Your Loves Heart

    Top 10 Romantic Shayaris to Melt Your Love’s Heart ❤️ (Hinglish) Love ko express karna ek art hai. Aur jab baat aati hai romantic shayari ki, toh woh dil ke jazbaat ka sabse khoobsurat tareeka hota hai. Agar aap apne pyaar ko shayari ke zariye impress karna chahte hain, toh yeh blog aapke liye perfect hai. Yahaan aapko milengi Top 10 Romantic Shayaris, jo aapke partner ka dil jeet lengi. 💖

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  • मैं तबाह हूँ तेरे इश्क में

    मैं तबाह हूँ तेरे इश्क में

    मैं तबाह हूँ तेरे इश्क मेंइस शायरी का सफर हमें प्यार और दर्द की गहराइयों में ले जाता है। जब इश्क़ की आग में दिल जलता है और वादे टूट जाते हैं, तब तबाही की कहानी लिखी जाती है। यह शायरी हमें उन भावनाओं से रूबरू कराती है जो सच्चे प्रेम में मिलती हैं – वो मधुर यादें, बेमिसाल ख्वाब, और अंततः दिल का टूटना। आइए, इस दिल की दास्तान को और करीब से समझें और महसूस करें। (more…)

  • अकबर इलाहाबादी शायरी का सफर

    अकबर इलाहाबादी शायरी का सफर

    अकबर इलाहाबादी शायरी का सफर इस ब्लॉग में हम प्रसिद्ध शायर अकबर इलाहाबादी की शायरी के अद्वितीय सफर को जानेंगे। उनकी रचनाओं में हास्य, व्यंग्य, और समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार शामिल हैं। अकबर इलाहाबादी की शायरी न केवल उनके समय के समाज का प्रतिबिंब है, बल्कि आज के दौर में भी उनकी कविताएँ प्रासंगिक हैं। आइए, उनकी बेहतरीन शायरी के माध्यम से उनके जीवन और विचारों को करीब से जानें। (more…)

  • दिल के जज़्बात नई पीढ़ी की शायरी का संगम

    दिल के जज़्बात नई पीढ़ी की शायरी का संगम

    दिल के जज़्बात: नई पीढ़ी की शायरी का संगम शायरी, दिल से निकली वो आवाज़ है, जो सीधे दिल को छूती है। बदलते दौर के साथ, शायरी ने भी नए रंग और अहसास जोड़े हैं। आज की शायरी रिश्तों, प्यार, दोस्ती, और ज़िंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों को बयां करती है। यह हर दिल की कहानी है।
    चलिए, आपको ले चलते हैं कुछ नई और ट्रेंडिंग शायरियों के सफर पर, जो आपके दिल को छू जाएगी।

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  • घर से दूर नौकरी शायरी

    घर से दूर नौकरी शायरी

    घर से दूर नौकरी शायरी | (more…)

  • प्यार पर शेर – Love Shayari

    प्यार पर शेर – Love Shayari

    इश्क़, उर्दू कविता में सबसे लोकप्रिय विषयों में से एक है। इश्क़ पर सबसे प्रसिद्ध शेरों की सूची तैयार है। इनका चयन प्रसिद्धता और प्रत्येक शेर की गुणवत्ता के आधार पर किया गया है। हम जानते हैं कि इस सूची में कई बेहतर शेर हो सकते हैं, जिन्हें हमने शामिल नहीं किया हो। उम्मीद है कि आप चयन का आनंद लेंगे, और फिर भी हम आपके सहभाग में सूची को और बेहतर बनाने में भागीदार होने की तरफ देखते हैं। (more…)

  • 10 Heartfelt Love Shayari in Hindi | Real Shayari

    10 Heartfelt Love Shayari in Hindi | Real Shayari

    Love is a language that transcends words and finds its expression in the depths of the heart. Here are ten beautiful love Shayari in Hindi that capture the essence of love, passion, and devotion. (more…)

  • ग़म नहीं होता है आज़ादों को बेश अज़-यक-नफ़स | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ग़म नहीं होता है आज़ादों को बेश अज़-यक-नफ़स | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ग़म नहीं होता है आज़ादों को बेश अज़-यक-नफ़स | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ग़म नहीं होता है आज़ादों को बेश अज़-यक-नफ़स

    बर्क़ से करते हैं रौशन शम्-ए-मातम-ख़ाना हम

     

    महफ़िलें बरहम करे है गंजिंफ़ा-बाज़-ए-ख़याल

    हैं वरक़-गर्दानी-ए-नैरंग-ए-यक-बुत-ख़ाना हम

     

    बावजूद-ए-यक-जहाँ हंगामा पैदाई नहीं

    हैं चराग़ान-ए-शबिस्तान-ए-दिल-ए-परवाना हम

     

    ज़ोफ़ से है ने क़नाअत से ये तर्क-ए-जुस्तुजू

    हैं वबाल-ए-तकिया-गाह-ए-हिम्मत-ए-मर्दाना हम

     

    दाइम-उल-हब्स इस में हैं लाखों तमन्नाएँ ‘असद’

    जानते हैं सीना-ए-पुर-ख़ूँ को ज़िंदाँ-ख़ाना हम

     

    बस-कि हैं बद-मस्त-ए-ब-शिकन ब-शिकन-ए-मय-ख़ाना हम

    मू-ए-शीशा को समझते हैं ख़त-ए-पैमाना हम

     

    बस-कि हर-यक-मू-ए-ज़ुल्फ़-अफ़्शाँ से है तार-ए-शुआअ’

    पंजा-ए-ख़ुर्शीद को समझे हैं दस्त-ए-शाना हम

     

    मश्क़-ए-अज़-ख़ुद-रफ़्तगी से हैं ब-गुलज़ार-ए-ख़याल

    आश्ना ताबीर-ए-ख़्वाब-ए-सब्ज़ा-ए-बेगाना हम

     

    फ़र्त-ए-बे-ख़्वाबी से हैं शब-हा-ए-हिज्र-ए-यार में

    जूँ ज़बान-ए-शम्अ’ दाग़-ए-गर्मी-ए-अफ़्साना हम

     

    शाम-ए-ग़म में सोज़-ए-इश्क़-ए-आतिश-ए-रुख़्सार से

    पुर-फ़शान-ए-सोख़्तन हैं सूरत-ए-परवाना हम

     

    हसरत-ए-अर्ज़-ए-तमन्ना याँ से समझा चाहिए

    दो-जहाँ हश्र-ए-ज़बान-ए-ख़ुश्क हैं जूँ शाना हम

     

    कश्ती-ए-आलम ब-तूफ़ान-ए-तग़ाफ़ुल दे कि हैं

    आलम-ए-आब-ए-गुदाज़-ए-जौहर-ए-अफ़्साना हम

     

    वहशत-ए-बे-रब्ती-ए-पेच-ओ-ख़म-ए-हस्ती न पूछ

    नंग-ए-बालीदन हैं जूँ मू-ए-सर-ए-दीवाना हम

    ग़म नहीं होता है आज़ादों को बेश अज़-यक-नफ़स | मिर्ज़ा ग़ालिब

  • दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना

    बारे अपनी बेकसी की हम ने पाई दाद याँ

     

    हैं ज़वाल-आमादा अज्ज़ा आफ़रीनश के तमाम

    महर-ए-गर्दूं है चराग़-ए-रहगुज़ार-ए-बाद याँ

     

    है तरह्हुम-आफ़रीं आराइश-ए-बे-दाद याँ

    अश्क-ए-चश्म-ए-दाम है हर दाना-ए-सय्याद याँ

     

    है गुदाज़-ए-मोम अंदाज़-ए-चकीदन-हा-ए-ख़ूँ

    नीश-ए-ज़ंबूर-ए-असल है नश्तर-ए-फ़स्साद या

     

    ना-गवारा है हमें एहसान-ए-साहब-दाैलताँ

    है ज़र-ए-गुल भी नज़र में जौहर-ए-फ़ौलाद याँ

     

    जुम्बिश-ए-दिल से हुए हैं उक़्दा-हा-ए-कार वा

    कम-तरीं मज़दूर-ए-संगीं-दस्त है फ़रहाद याँ

     

    क़तरा-हा-ए-ख़ून-ए-बिस्मिल ज़ेब-ए-दामाँ हैं ‘असद’

    है तमाशा करदनी गुल-चीनी-ए-जल्लाद याँ

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब

  • रफ़्तार-ए-उम्र क़त-ए-रह-ए-इज़्तिराब है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    रफ़्तार-ए-उम्र क़त-ए-रह-ए-इज़्तिराब है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    रफ़्तार-ए-उम्र क़त-ए-रह-ए-इज़्तिराब है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    रफ़्तार-ए-उम्र क़त-ए-रह-ए-इज़्तिराब है

    इस साल के हिसाब को बर्क़ आफ़्ताब है

     

    मीना-ए-मय है सर्व नशात-ए-बहार से

    बाल-ए-तदरौ जल्वा-ए-मौज-ए-शराब है

     

    ज़ख़्मी हुआ है पाश्ना पा-ए-सबात का

    ने भागने की गूँ न इक़ामत की ताब है

     

    जादाद-ए-बादा-नोशी-ए-रिन्दाँ है शश-जिहत

    ग़ाफ़िल गुमाँ करे है कि गेती ख़राब है

     

    नज़्ज़ारा क्या हरीफ़ हो उस बर्क़-ए-हुस्न का

    जोश-ए-बहार जल्वे को जिस के नक़ाब है

     

    मैं ना-मुराद दिल की तसल्ली को क्या करूँ

    माना कि तेरे रुख़ से निगह कामयाब है

     

    गुज़रा ‘असद’ मसर्रत-ए-पैग़ाम-ए-यार से

    क़ासिद पे मुझ को रश्क-ए-सवाल-ओ-जवाब है

     

    ज़ाहिर है तर्ज़-ए-क़ैद से सय्याद की ग़रज़

    जो दाना दाम में है सो अश्क-ए-कबाब है

     

    बे-चश्म-ए-दिल न कर हवस-ए-सैर-ए-लाला-ज़ार

    या’नी ये हर वरक़ वरक़-ए-इंतिख़ाब है

    रफ़्तार-ए-उम्र क़त-ए-रह-ए-इज़्तिराब है | मिर्ज़ा ग़ालिब