मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं
मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं,
क्या इसी चीज़ को कहते हैं गुज़ारा होना।
वो मेरे बाद भी खुश होगा किसी और के साथ,
मीठे चश्मों को कहाँ आता है खरा होना।
by admin ·
मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं,
क्या इसी चीज़ को कहते हैं गुज़ारा होना।
वो मेरे बाद भी खुश होगा किसी और के साथ,
मीठे चश्मों को कहाँ आता है खरा होना।
by admin · Published April 13, 2020
by admin · Published May 30, 2018
by admin · Published December 20, 2021
Follow: