तन्हाई की यह कुछ ऐसी अजब रात है
तन्हाई की यह कुछ ऐसी अजब रात है तुझसे जुडी हुयी हर याद मेरे साथ है तड़प रहा है तनहा चाँद विना चांदनी के इस अंधेरी रात में आज कुछ अलग बात है
अधूरी सी कहानी दिल की और पूरा प्यार तुम गीली पलकों की नमी और बेरहम याद तुम अनछुआ दिल का कोना और रूह में घुला एहसास तुम
खुद को खो दिया हमने अपनों को पाते पाते और लोग पूछते है कोई तकलीफ तो नहीं है खुद को खो दिया हमने
सवाल पानी का नहीं प्यास का है सवाल मौत का नहीं सांसो का है दोस्त तो बहुत है दुनिया में लेकिन सवाल दोस्ती का नहीं विश्वास का है
आओ अपने देश का सम्मान करें शहीदों की कुर्बानियों को याद करें समझें हम अपने कर्तव्यों को मिलकर आओ हम गणतंत्र दिवस पर शहीदों को नमन करें
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