एक उलझन सी बन गयी जिंदगी

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एक उलझन सी बन गयी जिंदगी

ना ख्याल अपने हुए
ना ख्वाब हिस्से आये
एक उलझन सी बन गयी जिंदगी
ना सवाल हमने पूछे
ना जवाब हिस्से आये

उलझन पे एक खूबसूरत शायरी नीचे लिखी गयी है |

कभी-कभी जिन्दगी हमें उस मुकाम पर पहुंचा देती हैं,
जहां से ना ही आगे बढ़ सकते हैं,
और ना ही पिछे हट सकते हैं;
बस अपने में उलझ कर रह जाते हैं।
हम इतने खूबसूरत तो नहीं मगर हाँ
जिसे आँख भर के देख ले उसे उलझन में डाल देते है।
तुम तो मेरे हर उल्झन का जवाब थे,
न जाने कब खुद एक उलझन बन गए।
उलझे धागे के जैसा है मेरा दिल,
अगर सुलझ गया तो बहुत टुकड़े होंगे।
तेरे इस सादगी को देख कर ये उलझन है,
कौन सा फूल चुनु तेरी बंदगी के लिए।

 

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