आंसुओ की तरह बिछड़ जाते है लोग
कब साथ निभाते है लोग आंसुओ की तरह बिछड़ जाते है लोग वो जमाना और था जब रोते थे गैरो के लिए लोग अब तो अपनों को ही रुलाकर मुस्कराते है लोग
कब साथ निभाते है लोग आंसुओ की तरह बिछड़ जाते है लोग वो जमाना और था जब रोते थे गैरो के लिए लोग अब तो अपनों को ही रुलाकर मुस्कराते है लोग
जाने क्या मुझसे जमाना चाहता है मेरा दिल तोड़कर मुझे हसाना चाहता है जाने कौनसी बात झलकती है मेरे चहरे से हर शख्स मुझे आजमाना चाहता है
जीत किसके लिए यह हार किसके लिए जिंदगी भर यह तकरार किसके लिए जो भी आया है वो जायगा एक दिन फिर इतना अहंकार किस लिए
अपने गमो की तू नुमाइश ना कर अपने नसीब की तू यूँ आजमाइश ना कर जो तेरा है वो खुद तेरे दर पर चल कर आएगा रोज उसे पाने की ख्वाइश ना कर
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