कभी रो लेने दो अपने कंधे पर सिर रखकर मुझे
कि दर्द का बबंडर अब संभाला नहीं जाता
कब तक छुपा के रखें आँखों में इसे
कि आंसुओ का समंदर अब संभाला नहीं जाता
Category: ग़म
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कभी रो लेने दो अपने कंधे पर सिर रखकर मुझे
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लोग मुझसे अक्सर कहते है
लोग मुझसे अक्सर कहते है
की बदल गए हो तुम में भी मुस्कराकर कहती हु
कि टूटे हुए फूलो का रंग अक्सर बदल जाता है -

तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी
तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी,
वरना हमको कहाँ तुम से शिकायत होगी,
ये तो बेवफा लोगों की दुनिया है,
तुम अगर भूल भी जाओ तो रिवायत होगी। -

बढ़ रहा है दर्द फिर उसे भुला देने के बाद
बढ़ रहा है दर्द फिर उसे भुला देने के बाद
याद उसकी और आयी उसका खत जला देने के बाद -

चिराग से ना पूछो वाकी तेल कितना है
चिराग से ना पूछो वाकी तेल कितना है
सांसो से ना पूछो वाकी खेल कितना है
पूछो उस कफ़न में लिपटे मुर्दे से
जिंदगी में गम और कफ़न में चैन कितना है -

सिमट गया मेरा प्यार भी चंद अल्फाजों में
सिमट गया मेरा प्यार भी चंद अल्फाजों में
जब उन्होंने कहा कि प्यार तो है लेकिन तुमसे नहीं -

बहुत जुदा है औरो से मेरे दर्द की कहानी
बहुत जुदा है औरो से मेरे दर्द की कहानी
क्योकि झख्म का पता नहीं और दर्द की कोई इम्तहा नहीं -

एक उलझन सी बन गयी जिंदगी
रिश्तों की उलझन शायरी, अजीब सी उलझन है शायरी, परेशानी शायरी, उदास जिंदगी शायरी हिंदी में | उलझन जिंदगी शायरी| उलझन पर शेर – शायरी, स्टेटस, कोट्स, सुविचार एवं कविता हिन्दी में | (more…)
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वो तो अपना दर्द रो रो कर सुनाते रहे
वो तो अपना दर्द रो रो कर सुनाते रहे
हमारी तन्हाइयों से भी आंखें चुराते रहे
हमें भी मिल गया ख़िताब ऐ वेवफा
क्योकि हम हर दर्द मुस्करा कर छुपाते रहे -

जब जब तेरी याद आती है
जब जब तेरी याद आती है
दिल में ग़मों की बिजली सी कौंध जाती है
मै टूटकर भी खामोश रहती हु
लेकिन मेरे दिल की खनक दूर तक जाती है