Category: ग़म

shayari

कभी रो लेने दो अपने कंधे पर सिर रखकर मुझे

कभी रो लेने दो अपने कंधे पर सिर रखकर मुझे कि दर्द का बबंडर अब संभाला नहीं जाता कब तक छुपा के रखें आँखों में इसे कि आंसुओ का समंदर अब संभाला नहीं जाता

तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी

तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी, वरना हमको कहाँ तुम से शिकायत होगी, ये तो बेवफा लोगों की दुनिया है, तुम अगर भूल भी जाओ तो रिवायत होगी।

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चिराग से ना पूछो वाकी तेल कितना है

चिराग से ना पूछो वाकी तेल कितना है सांसो से ना पूछो वाकी खेल कितना है पूछो उस कफ़न में लिपटे मुर्दे से जिंदगी में गम और कफ़न में चैन कितना है

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सिमट गया मेरा प्यार भी चंद अल्फाजों में

सिमट गया मेरा प्यार भी चंद अल्फाजों में जब उन्होंने कहा कि प्यार तो है लेकिन तुमसे नहीं