किस किस को खरीदोगे इन कागज के नोटों से किस्मत परखने के लिए तो आज भी सिक्का ही उछलता है...
एक जुर्म हुआ है हमसे हम भी किसी को दिल दे बैठे है अपना उसे समझ कर सब भेद दे बैठे है फिर उसके प्यार के लिए दिल और जान गवा बैठे है बहुत याद आते है वो जो हमको भुला बैठे है ...
अपनों को दूर जाते देखा है सपनो को चूर होते देखा है लोग कहते है कि फूल कभी रोते नहीं अरे तन्हाइयो में हमने फूलों को भी रोते देखा है...
शायद ये दिल तो किसी और के घर का परिंदा है जो सीने में तो रहता है लेकिन हमारे बस में नहीं रहता है...
एक प्यारा सा एहसास हो तुम हर पल मेरे दिल के पास हो तुम मेरे लिए हुकम का इक्का हो तुम माना कि एक विश्वास हो तुम शायद इसलिए ही कुछ खास हो तुम...
दिल किसी से तब ही लगाना जब चहरो को पढ़ना सिख लो क्योकि हर दिल की फितरत में इश्कवाजी नहीं होती है...
बड़े शोक से बनाया था उसने मेरे दिल में घर और जब रहने की बारी आयी तो ठिकाना बदल लिया...









