अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनाती है मीलों के फास्लो में , कुछ ठहराव वो लाती है ग़मो की घरी में वह...
ग़म / ज़िन्दगी / तन्हाई / सामान्य / हिंदी
by admin · Published October 26, 2017 · Last modified April 30, 2018
अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनाती है मीलों के फास्लो में , कुछ ठहराव वो लाती है ग़मो की घरी में वह...
ज़िन्दगी / तन्हाई / दोस्ती / सामान्य / हिंदी
by admin · Published October 26, 2017 · Last modified April 30, 2018
ज़रा तिरछी पड़ने लगी है किरन अब ज़रा सर्दियाँ सब्ज़ पत्तों में उतरीं ज़रा पड़ रही हैं कहीं और ही अब जवाँ हुस्न की बुल्हवस वो निगाहें तसव्वुर वो माज़ी का धुँधला हुआ कुछ...
मिल जायेंगा हमें भी कोई टूट के चाहने वाला… अब शहर का शहर तो बेवफा नहीं हो सकता …
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