Category: तन्हाई

shayari

मेरी मोहब्बत बेजुबां होती रही

मेरी मोहब्बत बेजुबां होती रही कोई नहीं आया मेरा हाल पूछने मेरी धड़कने अपना वजूद खोती रही बस बारिश थी जो मेरे साथ रोती रही

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उसको चाहा लेकिन इजहार नहीं करना नहीं आया

उसको चाहा लेकिन इजहार नहीं करना नहीं आया उम्र कट गयी लेकिन हमे प्यार करना नहीं आया उसने हमसे कुछ माँगा वो भी जुदाई और हमे उनसे इंकार करना नहीं आया

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किसी को मोहब्बत की गहराई मार डालती है

किसी को मोहब्बत की गहराई मार डालती है किसी को मोहब्बत की सच्चाई मार डालती है मोहब्बत करके कोई नई बच पाया आज तक जो बच गया उसको तन्हाई मर डालती है

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हम भी किसी को दिल दे बैठे है 

एक जुर्म हुआ है हमसे  हम भी किसी को दिल दे बैठे है  अपना उसे समझ कर  सब भेद दे बैठे है  फिर उसके प्यार के लिए  दिल और जान गवा बैठे है  बहुत...

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मेरे प्यार का भी अब वो इम्तहान लेते है

मेरे प्यार का भी अब वो इम्तहान लेते है दिल में कितनी जगह है पूछते है चाहते है हम उन्हें खुद से भी ज्यादा वो अब चाहने की भी वजह पूछते है

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अपनों को दूर जाते देखा है

    अपनों को दूर जाते देखा है सपनो को चूर होते देखा है लोग कहते है कि फूल कभी रोते नहीं अरे तन्हाइयो में हमने फूलों को भी रोते देखा है

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मज़बूरी में जब कोई जुदा होता है

मज़बूरी में जब कोई जुदा होता है तो जरुरी नहीं कि वो बेवफा है देकर के आपकी आँखों में आँसू अकेले में आपसे ज्यादा वो रोता है