इश्क़ वालों से न पूंछो कि
उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है
इश्क़ वालों से न पूंछो किउनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है जुदा हो हमसफ़र जिसका,वो उसको याद करता है न हो जिसका कोई वो मिलने की फ़रियाद करता हैसलाम-ए-इश्क़ मेरी जाँ ज़रा...
