हर एक बात पे कहते हो
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो’ले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा कोई बताओ कि वो शोख़-ए-तुंद-ख़ू क्या...
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो’ले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा कोई बताओ कि वो शोख़-ए-तुंद-ख़ू क्या...
मोम के पास कभी आग को लेकर देखूंसोचता हूँ के तुझे हाथ लगाकर देखूं मैंने देखा है ज़माने को शराब पीकरदम निकल जाए अगर होश में आकर देखूं दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र...
अनदेखे धागों से,कुछ यू बांध गया मुझको,कि वो साथ ही नहीं,और हम आजाद भी नहीं|
बड़ी मुश्किल से बना हूँ,टूट जाने के बाद |मै आज भी रो देता हु,अक्सर मुस्कराने के बाद
मैंने कब कहा कि,वह मिल जाए मुझे?कहीं वो गैर ना हो जाए,बस इतनी सी हसरत है |उन रिश्तो को भी निभाया है मैंने,जिनमें न मिलना,सबसे पहले सर्त थी |
याद तो उन्हें भी आएंगे,वह लम्हे, कि कोई तो था,जब कोई न था|
टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.बात छोटी सी है मगर जान,निकल जाती हैमुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते
तूने तो रुला कर रख दिया ए जिंदगी,जा कर पूछ मेरी मां से कितने लाडले थे हम,न जाने क्यों आज अपना घर मुझे अनजान सा लगता है,तेरे जाने के बाद मां |यह घर, घर...
जरा देखो दरवाजे पे,दस्तक किसने दी है?अगर इश्क़ हो तो कहना,यहां दिल नहीं रहता |
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