Author: admin

साथी न कोई मंज़िल
दिया है न कोई महफ़िल
चला मुझे लेके ऐ दिल
अकेला कहाँ

साथी न कोई मंज़िलदिया है न कोई महफ़िलचला मुझे लेके ऐ दिलअकेला कहाँ हमदम कोई मिले कहींऐसे नसीब ही नहींबेदर्द है ज़मीं, दूर आसमाँसाथी न कोई मंजिल… गलियां हैं अपने देस कीफिर भी हैं...

सज़ा का हाल सुनाये जज़ा की बात करें
ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें

सज़ा का हाल सुनाये जज़ा की बात करेंख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें उन्हें पता भी चले और वो ख़फ़ा भी न होइस एहतियात से क्या मज़ा की बात करें हमारे...

मैं ज़िन्दा हूँ यह मुश्तहर कीजिए

मैं ज़िन्दा हूँ यह मुश्तहर कीजिए मेरे क़ातिलों को ख़बर कीजिए । ज़मीं सख़्त है आसमां दूर है बसर हो सके तो बसर कीजिए । सितम के बहुत से हैं रद्द-ए-अमल ज़रूरी नहीं चश्म...

उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है
परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है

उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी हैपरों की अब के नहीं हौसलों की बारी है मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँमुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है कोई बताये ये उसके ग़ुरूर-ए-बेजा...

इंतहा आज इश्क़ की कर दी
आपके नाम ज़िन्दगी कर दी

इंतहा आज इश्क़ की कर दीआपके नाम ज़िन्दगी कर दी था अँधेरा ग़रीब ख़ाने मेंआपने आ के रौशनी कर दी देने वाले ने उनको हुस्न दियाऔर अता मुझको आशिक़ी कर दी तुमने ज़ुल्फ़ों को...

आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए
हमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए

आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गएहमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए अपने आने का सबब हम क्या बताएँ आपकोबैठे बैठे याद आई आपकी हम आ गए हम है दिलवाले...

सांझ की लाली सुलग-सुलग कर बन गई काली धूल

सांझ की लाली सुलग-सुलग कर बन गई काली धूल आए न बालम बेदर्दी मैं चुनती रह गई फूल रैन भई, बोझल अंखियन में चुभने लागे तारे देस में मैं परदेसन हो गई जब से...

मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा,
जागते रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊंगा।

मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा,जागते रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊंगा। हो के कदमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा,ख़ाक में मिलकर भी मैं खुशबू बचा ले जाऊंगा। कौन...

तमन्ना छोड़ देते हैं… इरादा छोड़ देते हैं,
चलो एक दूसरे को फिर से आधा छोड़ देते हैं।

तमन्ना छोड़ देते हैं… इरादा छोड़ देते हैं,चलो एक दूसरे को फिर से आधा छोड़ देते हैं। उधर आँखों में मंज़र आज भी वैसे का वैसा है,इधर हम भी निगाहों को तरसता छोड़ देते...

तुम्हारी राह में मिटटी के घर नहीं आते
इसीलिए तुम्हे हम नज़र नहीं आते

तुम्हारी राह में मिटटी के घर नहीं आतेइसीलिए तुम्हे हम नज़र नहीं आते मोहब्बतो के दिनों की यही खराबी हैये रूठ जाएँ तो लौट कर नहीं आते जिन्हें सलीका है तहजीब-ए-गम समझाने काउन्ही के...