Author: admin

  • साथी न कोई मंज़िलदिया है न कोई महफ़िलचला मुझे लेके ऐ दिलअकेला कहाँ

    साथी न कोई मंज़िल
    दिया है न कोई महफ़िल
    चला मुझे लेके ऐ दिल
    अकेला कहाँ

    साथी न कोई मंज़िल
    दिया है न कोई महफ़िल
    चला मुझे लेके ऐ दिल
    अकेला कहाँ

    हमदम कोई मिले कहीं
    ऐसे नसीब ही नहीं
    बेदर्द है ज़मीं, दूर आसमाँ
    साथी न कोई मंजिल…

    गलियां हैं अपने देस की
    फिर भी हैं जैसे अजनबी
    किसको कहे कोई, अपना यहाँ
    साथी न कोई मंजिल…

    पत्थर के आशना मिले
    पत्थर के देवता मिले
    शीशे का दिल लिये, जाऊँ कहाँ
    साथी न कोई मंजिल…

  • सज़ा का हाल सुनाये जज़ा की बात करेंख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें

    सज़ा का हाल सुनाये जज़ा की बात करें
    ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें

    सज़ा का हाल सुनाये जज़ा की बात करें
    ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें

    उन्हें पता भी चले और वो ख़फ़ा भी न हो
    इस एहतियात से क्या मज़ा की बात करें

    हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं
    अगर क़बा हो तो बन्द-ए-क़बा की बात करें

    हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाता
    करें तो हम भी मगर किस ख़ुदा की बात करें

    वफ़ाशियार कई हैं कोई हसीं भी तो हो
    चलो फिर आज उसी बेवफ़ा की बात करें

  • मैं ज़िन्दा हूँ यह मुश्तहर कीजिए

    मैं ज़िन्दा हूँ यह मुश्तहर कीजिए

    मैं ज़िन्दा हूँ यह मुश्तहर कीजिए

    मेरे क़ातिलों को ख़बर कीजिए ।

    ज़मीं सख़्त है आसमां दूर है

    बसर हो सके तो बसर कीजिए ।

    सितम के बहुत से हैं रद्द-ए-अमल

    ज़रूरी नहीं चश्म तर कीजिए ।

    वही ज़ुल्म बार-ए-दिगर है तो फिर

    वही ज़ुर्म बार-ए-दिगर कीजिए ।

    कफ़स तोड़ना बाद की बात है

    अभी ख्वाहिश-ए-बाल-ओ-पर कीजिए ।

  • उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी हैपरों की अब के नहीं हौसलों की बारी है

    उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है
    परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है

    उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है
    परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है

    मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँ
    मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है

    कोई बताये ये उसके ग़ुरूर-ए-बेजा को
    वो जंग हमने लड़ी ही नहीं जो हारी है

    दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत
    ये एक चराग़ कई आँधियों पे भारी है

  • इंतहा आज इश्क़ की कर दीआपके नाम ज़िन्दगी कर दी

    इंतहा आज इश्क़ की कर दी
    आपके नाम ज़िन्दगी कर दी

    इंतहा आज इश्क़ की कर दी
    आपके नाम ज़िन्दगी कर दी

    था अँधेरा ग़रीब ख़ाने में
    आपने आ के रौशनी कर दी

    देने वाले ने उनको हुस्न दिया
    और अता मुझको आशिक़ी कर दी

    तुमने ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे बिखरा कर
    शाम रंगीन और भी कर दी

  • आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गएहमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए

    आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए
    हमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए

    आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए
    हमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए

    अपने आने का सबब हम क्या बताएँ आपको
    बैठे बैठे याद आई आपकी हम आ गए

    हम है दिलवाले भला हम पर किसी का ज़ोर क्या
    जायेंगे अपनी ख़ुशी अपनी ख़ुशी हम आ गए

    कहिये अब क्या है चराग़ों की ज़रुरत आपको
    लेके आँखों में वफ़ा की रौशनी हम आ गए

    जगजीत सिंह

  • सांझ की लाली सुलग-सुलग कर बन गई काली धूल

    सांझ की लाली सुलग-सुलग कर बन गई काली धूल

    सांझ की लाली सुलग-सुलग कर बन गई काली धूल

    आए न बालम बेदर्दी मैं चुनती रह गई फूल

    रैन भई, बोझल अंखियन में चुभने लागे तारे

    देस में मैं परदेसन हो गई जब से पिया सिधारे

    पिछले पहर जब ओस पड़ी और ठन्डी पवन चली

    हर करवट अंगारे बिछ गए सूनी सेज जली

    दीप बुझे सन्नाटा टूटा बाजा भंवर का शंख

    बैरन पवन उड़ा कर ले गई परवानों के पंख

  • मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा,जागते रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊंगा।

    मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा,
    जागते रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊंगा।

    मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा,
    जागते रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊंगा।

    हो के कदमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा,
    ख़ाक में मिलकर भी मैं खुशबू बचा ले जाऊंगा।

    कौन सी शय मुझको पहुँचाएगी तेरे शहर,
    ये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊंगा।

    कोशिशें मुझको मिटाने की भले हो कामयाब,
    मिटते मिटते भी मैं मिटने का मजा ले जाऊंगा।

    शोहरतें जिनकी वजह से दोस्त दुश्मन हो गए,
    सब यहीं रह जाएँगी मैं साथ क्या ले जाऊंगा।

  • तमन्ना छोड़ देते हैं… इरादा छोड़ देते हैं,चलो एक दूसरे को फिर से आधा छोड़ देते हैं।

    तमन्ना छोड़ देते हैं… इरादा छोड़ देते हैं,
    चलो एक दूसरे को फिर से आधा छोड़ देते हैं।

    तमन्ना छोड़ देते हैं… इरादा छोड़ देते हैं,
    चलो एक दूसरे को फिर से आधा छोड़ देते हैं।

    उधर आँखों में मंज़र आज भी वैसे का वैसा है,
    इधर हम भी निगाहों को तरसता छोड़ देते हैं।

    हमीं ने अपनी आँखों से समन्दर तक निचोड़े हैं,
    हमीं अब आजकल दरिया को प्यासा छोड़ देते हैं।

    हमारा क़त्ल होता है, मोहब्बत की कहानी में,
    या यूँ कह लो कि हम क़ातिल को ज़िंदा छोड़ देते हैं।

    हमीं शायर हैं, हम ही तो ग़ज़ल के शाहजादे हैं,
    तआरुफ़ इतना देकर बाक़ी मिसरा छोड़ देते हैं।

  • तुम्हारी राह में मिटटी के घर नहीं आतेइसीलिए तुम्हे हम नज़र नहीं आते

    तुम्हारी राह में मिटटी के घर नहीं आते
    इसीलिए तुम्हे हम नज़र नहीं आते

    तुम्हारी राह में मिटटी के घर नहीं आते
    इसीलिए तुम्हे हम नज़र नहीं आते

    मोहब्बतो के दिनों की यही खराबी है
    ये रूठ जाएँ तो लौट कर नहीं आते

    जिन्हें सलीका है तहजीब-ए-गम समझाने का
    उन्ही के रोने में आंसू नज़र नहीं आते

    खुशी की आँख में आंसू की भी जगह रखना
    बुरे ज़माने कभी पूछ कर नहीं आते