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  • हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं ज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए हैं

    हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं ज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए हैं

    हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं
    ज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए हैं

    ख़ुशबू जो लुटाती है मसलते हैं उसी को
    एहसान का बदला यही मिलता है कली को
    एहसान तो लेते है, सिला भूल गए हैं

    करते है मोहब्बत का और एहसान का सौदा
    मतलब के लिए करते है ईमान का सौदा
    डर मौत का और ख़ौफ़-ऐ-ख़ुदा भूल गए हैं

    अब मोम पिघल कर कोई पत्थर नही होता
    अब कोई भी क़ुर्बान किसी पर नही होता
    यूँ भटकते है मंज़िल का पता भूल गए हैं

  • सबने मिलाया हाथ यहाँ तीरगी* के साथकितना बड़ा मज़ाक हुआ रोशनी के साथ

    सबने मिलाया हाथ यहाँ तीरगी* के साथ
    कितना बड़ा मज़ाक हुआ रोशनी के साथ

    सबने मिलाया हाथ यहाँ तीरगी* के साथ
    कितना बड़ा मज़ाक हुआ रोशनी के साथ

    शर्तें लगाईं जाती नहीं दोस्ती के साथ
    कीजिये मुझे कुबूल मेरी हर कमी के साथ

    तेरा ख़याल, तेरी तलब, तेरी आरज़ू
    गुजरी है सारी उम्र किसी रोशनी के साथ

    किस काम की रही ये दिखावे की ज़िन्दगी
    वादे किए किसी से गुज़ारी किसी के साथ .

    दुनीयाँ को बेवफाई का इलज़ाम कौन दे ?
    अपनी ही निभ सकी न बहुत दिन किसी के साथ

  • मेरी आँख को यह सब कौन बताने देगाखवाब जिसके हैं वहीं नींद न आने देगा

    मेरी आँख को यह सब कौन बताने देगा
    खवाब जिसके हैं वहीं नींद न आने देगा

    मेरी आँख को यह सब कौन बताने देगा
    खवाब जिसके हैं वहीं नींद न आने देगा

    उसने यूँ बाँध लिया खुद को नये रिशतों में
    जैसे मुझ पर कोई इलज़ाम न आने देगा

    सब अंधेरे से कोई वादा किये बैठ हैं
    कौन ऐसे में मुझे शमा जलाने देगा

    भीगती झील, कमल, बाग महक, सन्नाटा,
    यह मेरा गाँव, मुझे शहर न जाने देगा

    वह भी आँखों में कई खवाब लिये बैठा है
    यह तसव्वुर* ही कभी नींद न आने देगा

    कल की बातें न करो, मुझ से कोई अहद न लो
    वक़्त बदलेगा तो कुछ याद न आने देगा

  • तुम बिन जाऊँ कहाँ, के दुनिया में आकेकुछ न फिर चाहा कभी तुमको चाहके, तुम बिन …

    तुम बिन जाऊँ कहाँ, के दुनिया में आके
    कुछ न फिर चाहा कभी तुमको चाहके, तुम बिन …

    तुम बिन जाऊँ कहाँ, के दुनिया में आके
    कुछ न फिर चाहा कभी तुमको चाहके, तुम बिन …

    देखो मुझे सर से कदम तक, सिर्फ़ प्यार हूँ मैं
    गले से लगालो के तुम्हारा बेक़रार हूँ मैं
    तुम क्या जानो के भटकता फिरा
    मैं किस गली, तुमको चाह के …

    अब है सनम हर मौसम, प्यार के काबिल
    पड़ी जहाँ छाओं हमारी, सज गयी महफ़िल
    महफ़िल क्या तनहाई में भी
    लगता है जी, तुमको चाह के …

  • इश्क़ वालों से न पूंछो किउनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है

    इश्क़ वालों से न पूंछो कि
    उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है

    इश्क़ वालों से न पूंछो कि
    उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है

    जुदा हो हमसफ़र जिसका,
    वो उसको याद करता है

    न हो जिसका कोई वो मिलने की फ़रियाद करता है
    सलाम-ए-इश्क़ मेरी जाँ ज़रा क़ुबूल कर लो

    तुम हमसे प्यार करने की ज़रा सी भूल कर लो
    मेरा दिल बेचैन, मेरा दिल बेचैन है हमसफ़र के लिये

  • आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़मानावो बाग़ की बहारें वो सब का चह-चहाना

    आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
    वो बाग़ की बहारें वो सब का चह-चहाना

    आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
    वो बाग़ की बहारें वो सब का चह-चहाना

    आज़ादियाँ कहाँ वो अब अपने घोँसले की
    अपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना

    लगती हो चोट दिल पर, आता है याद जिस दम
    शबनम के आँसूओं पर कलियों का मुस्कुराना

    वो प्यारी प्यारी सुरत, वो कामिनी सी मूरत
    आबाद जिसके दम से था मेरा आशियाना

  • अबके बरस भी वो नहीं आये बहार मेंगुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

    अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में
    गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

    अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में
    गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

    ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझे
    दिल तेरे बस में है ना मेरे इख़्तियार में

    है टूटे दिल में तेरी मुहब्बत, तेरा ख़याल
    कुछ रंग है बहार के उजड़ी बहार में

    आँसू नहीं हैं आँख में लेकिन तेरे बग़ैर
    तूफ़ान छुपे हुए हैं दिल-ए-बेक़रार में

  • हुस्न बाज़ार हुआ क्या कि हुनर ख़त्म हुआ
    आया पलको पे तो आँसू का सफ़र ख़त्म हुआ

    हुस्न बाज़ार हुआ क्या कि हुनर ख़त्म हुआ
    आया पलको पे तो आँसू का सफ़र ख़त्म हुआ

    उम्र भर तुझसे बिछड़ने की कसक ही न गयी
    कौन कहता है की मुहब्बत का असर ख़त्म हुआ

    नयी कालोनी में बच्चों की ज़िदे ले तो गईं
    बाप दादा का बनाया हुआ घर ख़त्म हुआ

    जा, हमेशा को मुझे छोड़ के जाने वाले
    तुझ से हर लम्हा बिछड़ने का तो डर ख़त्म हुआ

  • हम हैं राही प्यार के, हमसे कुछ ना बोलिएजो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिए

    हम हैं राही प्यार के, हमसे कुछ ना बोलिए
    जो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिए

    हम हैं राही प्यार के, हमसे कुछ ना बोलिए
    जो भी प्यार से मिला, हम उसी के हो लिए

    दर्द भी हमें कुबूल, चैन भी हमें कुबूल
    हमने हर तरह के फूल, हार में पिरो लिए
    जो भी प्यार…

    धूप थी नसीब में, तो धूप लिया है दम
    चाँदनी मिली तो हम, चाँदनी में सो लिए
    जो भी प्यार…

    दिल पे आसरा लिए, हम तो बस यूँ ही जिये
    इक कदम पे हँसस लिए, इक कदम पे रो लिए
    जो भी प्यार…

    राह में पड़े हैं हम, कब से आप की क़सम
    देखिये तो कम से कम, बोलिए न बोलिए
    जो भी प्यार…

    मजरूह सुल्तानपुरी