द्वारिकाधीश कह गए पार्थ से
द्वारिकाधीश कह गए पार्थ से एक दिन ऐसा कलयुग आएगा दूध और माखन किसी को न भायेगा इंसान मैगी चौमिन पिज़्ज़ा खायगा
द्वारिकाधीश कह गए पार्थ से एक दिन ऐसा कलयुग आएगा दूध और माखन किसी को न भायेगा इंसान मैगी चौमिन पिज़्ज़ा खायगा
एक अधूरी ख्वाहिश है मेरी काश वो भी पूरी हो जाये ऐ खुदा कुछ ऐसा कर कि हमारे विना उनकी हर ख्वाहिश अधूरी हो जाये
बाबुल तेरी बगिया की ये चहचहाती हुयी चिड़िया ना जाने कब उड़ जाये छोड़कर तेरी यह बगिया ना जाने कब बन जाये दुल्हन, यह छोटी सी गुड़िया
Ek rasta Aur bhi hai Manjil tak jane ka Seekh lo hunar Ha main ha milane ka
दीप तो आंधी में बुझ जाया करते है तारे तो बारिश में छुप जाया करते है फूल तो रात में मुरझाया करते है कितने खुशनसीब होते है वो लोग जिनके पास हर दर्द बांटने...
हर सुबह एक नयी जिंदगी दे आपके दिन का हर लम्हा हर पल ख़ुशी दे आपको जहा गम की छाया छू भी ना पाये खुदा वो जन्नत दे आपको
Asli Shayar / Mirza Ghalib / Shayar
by admin · Published November 8, 2017 · Last modified April 30, 2018
Shumār-e-sub.ha marġhūb-e-but-e-mushkil-pasand aayā Tamāshā-e-ba-yak-kaf burdan-e-sad-dil-pasand aayā Ba-faiz-e-be-dilī naumīdi-e-jāved āsāñ hai Kushāyish ko hamārā uqda-e-mushkil-pasand aayā Havā-e-sair-e-gul ā.īna-e-be-mehri-e-qātil Ki andāz-e-ba-ḳhūñ-ġhaltīdan-e-bismil-pasand aayā Ravānī-hā-e-mauj-e-ḳhūn-e-bismil se Tapaktā hai Ki lutf-e-be-tahāshā-raftan-e-qātil-pasand aayā ‘Asad’ har jā suḳhan ne tarh-e-bāġh-e-tāza Daalī...
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