दिल अब दिल ना रहा सरकारी दफ्तर बन गया है

shayari

यह तेरी कैसी मोहब्बत है जालिम
दिल अब दिल ना रहा सरकारी दफ्तर बन गया है
ना कोई काम करने को
ना किसी की बात सुनने को तैयार है

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