नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते है
सोचको बदलो तो सितारे बदल है.
कश्तियाँ बदलने की जरुरत नहीं
दिशा को बदलो तो किनारे खुद व् खुद बदल जाते है

नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते है
सोचको बदलो तो सितारे बदल है.
कश्तियाँ बदलने की जरुरत नहीं
दिशा को बदलो तो किनारे खुद व् खुद बदल जाते है

दरिया में अपनी कब्र बनाने चला गया
सूरज को डूबने से बचाने चला गया
तमन्ना तो सबसे आगे निकलने की थी मगर
जो गिरे थे उनको उठाने चला गया
अपनों की चाहतों में मिलाबट थी इस कदर
तंग आकर दुश्मनों को मनाने चला गया

दिल से लिखी बात दिल को छू जाती है
यह अक्सर अनकही बात कह जाती है
कुछ लोग दोस्ती के मायने बदल देते है
और कुछ लोगों की दोस्ती से दुनिया बदल जाती है

मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है
हर पहलु जिंदगी का इम्तहान होता है
डरने वालो को मिलता नहीं कुछ जिंदगी में
लड़ने वालों के कदमों में जहान होता है

यूँ ही नहीं मिल जाती है राही को मंजिल
एक जुनून दिल में जगाना पड़ता है
जब पूछा चिड़िया से कि कैसे बना आशियाना
तो चिडिया ने कहा
” भरनी पड़ती है उड़ान बार-बार
तिनका तिनका उठाना पड़ता है “

इंतजार की आरजू अब खो गयी है
खामोशियों की आदत अब हो गयी है
ना शिकवा रहा ना शिकायत किसी से
अगर है तो एक मोहब्बत
जो इन तन्हाइयो से हो गयी है

टुटा हो दिल अगर तो दुःख होता है
किसी से मोहब्बत करके यह दिल रोता है
दर्द का एहसास तब होता है जब किसी से मोहब्बत हो
और उसके दिल में कोई और होता है

अफ़सोस तो उस वक़्त होता है
जब अपनी पसंद कोई और चुरा लेता है
ख्वाब हम देखते है और
हकीकत कोई और बना लेता है

कभी रूठना मत नहीं तो जिंदगी बिखर जायगी
ये कोई खुली हुयी जुल्फ नहीं जो फिर से सवर जायगी
जुदा ना होना कभी उससे जो जान देता हो तुम पर
वरना उसकी याद में ही जिंदगी गुजर जायगी

खोल दे पंख मेरे परिंदा कहता है अभी और उड़ान वाकी है
जमीं नहीं है मंजिल मेरी अभी पूरा आसमाँ वाकी है
लहरों की ख़ामोशी को समंदर की वेवसी मत समझ नादाँ
जितनी गहराई अंदर है उतना बाहर तूफान वाकी है
उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो,
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है,
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो.
मैने सब कुछ पाया है बस तुझको पाना बाकी है,
कुछ कमी नहीं जिंदगी में बस तेरा आना बाकी है।
अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे ,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे ,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे ,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।
उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो;
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है;
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो
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