Monthly Archive: December 2017

shayari

जख्म तो हमको फूलों ने ही दिया है

जब भी किसी को करीब पाया है कसम खुदा की धोखा पाया है क्यों दोष देते है हम काँटों को जख्म तो हमको फूलों ने ही दिया है

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अफ़सोस वो हमारी चाहत से बेखबर निकला

कितना अजीब अपनी जिंदगी का सफर निकला सारे जहाँ का दर्द अपना मुकद्दर निकला जिसके नाम अपनी जिंदगी का हर लम्हा कर दिया अफ़सोस वो हमारी चाहत से बेखबर निकला

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ज़माने ने हमको दिया यही वफ़ा का सिला है

जिंदगी चाहत का सिलसिला है फिर भी जिसे चाहा वो कहा मिला है दुश्मनो से हमको कोई शिकायत नहीं अपनों ने ही लुटा बस इसी बात का गिला है जिसको चाहा उसने ही तोडा...

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क्युकी जिंदगी में सबक और साथ दोनों ही जरुरी है

सड़क कितनी भी साफ हो “धूल ” हो ही जाती है , इंसान की सोच कितनी भी अच्छी हो “भूल ” हो ही जाती है , अपनी जिंदगी में सबको अहमियत दो क्योकि जो...