अपनी मंज़िल का रास्ता भेजो जान हम को वहाँ बुला भेजो क्या हमारा नहीं रहा सावन ज़ुल्फ़ याँ भी कोई घटा भेजो नई कलियाँ जो अब खिली हैं वहाँ उन की ख़ुश्बू को इक ज़रा भेजो ...
चरासाजो की चरसाजी सेदर्द बदनाम तो नहीं होगा?हाँ! दवा दो, मगर ये बतलादो,मुझे आराम तो नहीं होगा?...

