Tag: ghazal

  • कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना

    कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना

    कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,
    यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।
    तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,
    दुनिया को बता कर क्या करना।
    तुम साथ निभाओ चाहत से,
    कोई रस्म निभा कर क्या करना।
    तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,
    फिर तुमको मना कर क्या करना।

  • अनदेखे  धागों से

    अनदेखे धागों से

    अनदेखे धागों से,
    कुछ यू बांध गया मुझको,
    कि वो साथ ही नहीं,
    और हम आजाद भी नहीं|

  • याद आने की वजह भी

    याद आने की वजह भी

    याद आने की वजह भी,
    बहुत अजीब है तुम्हारी|
    तुम वो गैर थे, जिसने मैंने,
    पल भर में अपना माना था|
  • टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.

    टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.

    टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.
    बात छोटी सी है मगर जान,
    निकल जाती है
    मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
    पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते

  • जरा देखो दरवाजे पे

    जरा देखो दरवाजे पे

    जरा देखो दरवाजे पे,
    दस्तक किसने दी है?
    अगर इश्क़ हो तो कहना,
    यहां दिल नहीं रहता |