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कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,दुनिया को बता कर क्या करना।तुम साथ निभाओ चाहत से,कोई रस्म निभा कर क्या करना।तुम खफ़ा भी अच्छे लगते...

अनदेखे धागों से

अनदेखे धागों से,कुछ यू बांध गया मुझको,कि वो साथ ही नहीं,और हम आजाद भी नहीं|

टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.

टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.बात छोटी सी है मगर जान,निकल जाती हैमुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते

जरा देखो दरवाजे पे

जरा देखो दरवाजे पे,दस्तक किसने दी है?अगर इश्क़ हो तो कहना,यहां दिल नहीं रहता |