टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.
टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.
बात छोटी सी है मगर जान,
निकल जाती है
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते
by admin ·
टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.
बात छोटी सी है मगर जान,
निकल जाती है
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते
Tags: ghazalShayari of Mirza Ghalibvideo of mirza
by admin · Published June 2, 2018
by admin · Published May 3, 2018
by admin · Published December 10, 2021
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