कभी उतरो तो इश्क़ के दरिया में
की किनारो के मुसाफिर हम नहीं हैं।
Category: Zari
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Love Shayari- February Special
महोब्बत न सही मेरी खुशफहमी ही रहने दो
की दिल में जीने की ख्वाहिश ज़रा सी और बाकी है I
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February Special Shayari
कोई मुलाक़ात न किसी वादे का तकाज़ा तुमसे
हम तो बस एक झूठी तस्सल्ली के तलबग़ार थे I



