कस्तूरी के जैसे महकते रहो
कस्तूरी के जैसे महकते रहो पंछी के जैसे उड़ते रहो सितारों के जैसे चमकते रहो तितली के जैसे मचलते रहो मम्मी पापा का आदर करते रहो सुन्दर वाणी से मन को हरो हम देते...
द्वारिकाधीश कह गए पार्थ से एक दिन ऐसा कलयुग आएगा दूध और माखन किसी को न भायेगा इंसान मैगी चौमिन पिज़्ज़ा खायगा
कभी किसी के रंग को मत देखो उसकी सोच को देखो क्योकि अगर सफ़ेद रंग में वफ़ा होती तो नमक हर जख्म की दवा होती
कोई ख़ुशी पाने के लिए रोता है कोई दुःख की पनाह में रोता है अजीब सी होती है ना जिंदगी कोई भरोसा दिलाने के लिए रोता है| कोई भरोसा करके रोता है|
शाम सूरज को ढलना सिखाती है शमां परवाने को जलना गिरने पर चोट तो जरूर लगती है लेकिन ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है |
सच्ची मोहब्बत तो दिल से होती है सच्चे रिश्ते भी दिल से होते है जरुरत के लिए बने रिश्ते अक्सर टूट जाया करते है |
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