हर ख़ुशी में कोई कमी सी है
हंसती आँखों में भी नमी सी है
हर ख़ुशी में कोई कमी सी हैहंसती आँखों में भी नमी सी है दिन भी चुपचाप सर झुकाये थारात की नब्ज़ भी थमी सी है ख्वाब था या गुबार था कोईगर्द इन पलकों पे...
हर ख़ुशी में कोई कमी सी हैहंसती आँखों में भी नमी सी है दिन भी चुपचाप सर झुकाये थारात की नब्ज़ भी थमी सी है ख्वाब था या गुबार था कोईगर्द इन पलकों पे...
मेरे जाने के बाद वो भी मुझे छुप-छुप कर देखती तो है,थोड़ी ही सही पर वो मोहब्बत करती तो है। इतनी मोहब्बत कम तो नहीं।वो इस तरह तो बोलती बहुत है, महफिलों में खिलखिलाती...
देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने, क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने। तेरे नीले नीले नैनो ने किया था...
दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूं मैंख़ाक ऐसी ज़िन्दगी पे कि पत्थर नहीं हूं मैं कयों गरदिश-ए-मुदाम से घबरा न जाये दिलइनसान हूं पयाला-ओ-साग़र नहीं हूं मैं या रब ! ज़माना मुझको...
ख़ुदा हमको ऐसी खुदाई न देकि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे ख़तावार समझेगी दुनिया तुझेअब इतनी ज्यादा सफाई न दे हंसो आज इतना कि इस शोर मेंसदा सिसकियों की सुनाई न दे अभी...
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगीयूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता जी बहुत चाहता है सच बोलेंक्या करें हौसला नहीं होता अपना दिल भी टटोल कर देखोफासला बेवजह नही होता कोई काँटा चुभा नहीं होतादिल अगर...
एक से हो गए मौसम हो, कि चेहरे सारेमेरी आँखों से कहीं खो गया मंजर मेरा किससे पूंछू कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों सेहर जगह ढूंढता फिरता है मुझे घर मेरा मुद्दतें हो...
आह को चाहिये इक उम्र असर होने तककौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक दाम हर मौज में है हलका-ए-सदकामे-नहंगदेखें क्या गुज़रे है कतरे पे गुहर होने तक आशिकी सबर तलब और...
अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वालाहमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला उसको रुख़सत तो किया था मुझे मालूम न थासारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला इक मुसाफिर के...
अपने आप जल गयीकल की रात टल गयीइक धुआं उठा थाफिर राख में बदल गयीबून्द बून्द टपकी शब्सड़कों पर पिघल गयीकल जो रात टल गयीकितना कुछ बदल गयी
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