Author: admin

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते होजब भी मन में आये क्यों रुला देते होनिगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो मेरे बहते आंसुओ की...

तेरी बातों का असर
जो छाया है मेरे दिल पर

तेरी बातों का असरजो छाया है मेरे दिल परयक़ीनन मुझे तड़पाएगाअब ये रात भरसोचा भूल जाऊंगा तुझेअब करूँगा ना यादमगर दर्द ही मिला मुझे,तुझे भूल कर

निकल पड़ा हूँ उस रास्ते पे
जो कभी ख़त्म नहीं होता

निकल पड़ा हूँ उस रास्ते पेजो कभी ख़त्म नहीं होता रुक जाता उस वक़्त अगर तूने….एक बार भी रोका होता आते हैं आज भी वो सपनेजब कभी गलती से, मैं सोता बनाता हूँ ख़यालो...

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुतयादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश कोमहसूस तुम्हें जो करने की, कोशिश करती है बहुत दावे...

ज़हर को दूध समझ कर कैसे पिया जाये
दिल हो अगर ज़ख़्मी तो उसे कैसे सिया जाये

ज़हर को दूध समझ कर कैसे पिया जायेदिल हो अगर ज़ख़्मी तो उसे कैसे सिया जाये जब खुद पर ही यकीन नहीं रहा मुझेतो तुझ पर यकीन अब कैसे किया जाये ज़िन्दगी है मेरी...

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते होजब भी मन में आये क्यों रुला देते होनिगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो मेरे बहते आंसुओ की...

पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है

पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी हैख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है फूलों में ग़ज़ल रखना ये रात की रानी हैइस में तेरी ज़ुल्फ़ों की बे-रब्त कहानी है एक ज़हन-ए-परेशाँ...