ज़हर को दूध समझ कर कैसे पिया जाये
दिल हो अगर ज़ख़्मी तो उसे कैसे सिया जाये
ज़हर को दूध समझ कर कैसे पिया जायेदिल हो अगर ज़ख़्मी तो उसे कैसे सिया जाये जब खुद पर ही यकीन नहीं रहा मुझेतो तुझ पर यकीन अब कैसे किया जाये ज़िन्दगी है मेरी...
