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तू हज़ार बार भी रूठे तो मना लूँगा तुझे

तू हज़ार बार भी रूठे तो मना लूँगा तुझे
मगर देख मोहब्बत में शामिल कोई दूसरा ना हो
किस्मत यह मेरा इम्तेहान ले रही है
तड़पकर यह मुझे दर्द दे रही है
दिल से कभी भी मैंने उसे दूर नहीं किया
फिर क्यों बेवफाई का वह इलज़ाम दे रही है
मरे तो लाखों होंगे तुझपर
मैं तो तेरे साथ जीना चाहता हूँ
अपनों के बीच बेगाने हो गए हैं
प्यार के लम्हे अनजाने हो गए हैं
जहाँ पर फूल खिलते थे कभी
आज वहां पर वीरान हो गए हैं
नज़रों से देखो तोह आबाद हम हैं
दिल से देखो तोह बर्बाद हम हैं
जीवन का हर लम्हा दर्द से भर गया
फिर कैसे कह दें आज़ाद हम हैं
ज़िन्दगी के सफ़र में आपका सहारा चाहिए
आपके चरणों का बस आसरा चाहिए
हर मुश्किलों का हँसते हुए सामना करेंगे
बस ठाकुर जी आपका एक इशारा चाहिए
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