कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना
कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।
तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,
दुनिया को बता कर क्या करना।
तुम साथ निभाओ चाहत से,
कोई रस्म निभा कर क्या करना।
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,
फिर तुमको मना कर क्या करना।
by admin ·
कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।
तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,
दुनिया को बता कर क्या करना।
तुम साथ निभाओ चाहत से,
कोई रस्म निभा कर क्या करना।
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,
फिर तुमको मना कर क्या करना।
Tags: ghazalhindi love shayariShayari of Mirza Ghalib
by admin · Published June 20, 2018
by admin · Published February 21, 2022
by admin · Published November 22, 2021 · Last modified November 25, 2021
Follow: