अकेलापन – जब कोई साथ नहीं होता

अकेलापन सिर्फ एक एहसास नहीं बल्कि एक ऐसा दर्द है जिसे हर कोई समझ नहीं पाता। कई बार इंसान बाहर से खुश दिखता है लेकिन अंदर से पूरी तरह टूट चुका होता है। जब अपने ही दूर हो जाएं, तब तन्हाई इंसान की सबसे बड़ी साथी बन जाती है। अकेलेपन की यही तकलीफ इन शायरियों में छुपी हुई है।

शायरी 1
अकेलापन अब अच्छा लगता है,
हर रिश्ता अधूरा लगता है,
जब अपने ही बदल जाएं,
तो हर सपना झूठा लगता है।

शायरी 2
खामोशी बहुत कुछ कहती है,
हर दर्द चुपचाप सहती है,
तन्हा दिल की ये दुनिया,
हर रात अकेले रोती है।

शायरी 3
अब किसी का इंतजार नहीं,
दिल को किसी से प्यार नहीं,
तन्हाई ही मेरी साथी है,
और कोई मेरा यार नहीं।

शायरी 4
हर खुशी मुझसे दूर हो गई,
जिंदगी अधूरी सी हो गई,
जब से अकेले चलना सीखा,
तन्हाई जरूरी सी हो गई।

शायरी 5
दिल हर पल उदास रहता है,
दर्द अंदर ही अंदर बहता है,
लोग पूछते हैं मुस्कान का राज,
मगर कोई दर्द नहीं समझता है।

शायरी 6
अब रातें सिर्फ दर्द लाती हैं,
पुरानी यादें सताती हैं,
अकेलेपन की इस दुनिया में,
सिर्फ खामोशी साथ निभाती है।

शायरी 7
जिसे अपना समझा वही दूर हो गया,
दिल का हर सपना चूर हो गया,
अब तन्हाई ही सच्ची लगती है,
बाकी हर रिश्ता मजबूर हो गया।

शायरी 8
अकेलापन धीरे-धीरे मारता है,
हर खुशी दिल से हारता है,
मगर फिर भी इंसान जीता है,
क्योंकि दर्द जीना सिखाता है।

शायरी 9
अब किसी पर भरोसा नहीं होता,
दिल किसी से खुला नहीं होता,
जब दर्द बहुत गहरा हो जाए,
तो इंसान पहले जैसा नहीं होता।

शायरी 10
तन्हाई मेरी पहचान बन गई,
खामोशी मेरी जान बन गई,
अब किसी की जरूरत नहीं,
अकेलापन ही मेरी दुनिया बन गई

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