मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं
मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं,
क्या इसी चीज़ को कहते हैं गुज़ारा होना।
वो मेरे बाद भी खुश होगा किसी और के साथ,
मीठे चश्मों को कहाँ आता है खरा होना।
by admin ·
मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं,
क्या इसी चीज़ को कहते हैं गुज़ारा होना।
वो मेरे बाद भी खुश होगा किसी और के साथ,
मीठे चश्मों को कहाँ आता है खरा होना।
by admin · Published June 16, 2021
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