तू कभी मेरा था ही नहीं – दर्द भरी मोहब्बत शायरी
कुछ लोग हमारी जिंदगी में आते हैं और बिना चाहे दिल में बस जाते हैं। हम उन्हें अपना सब कुछ मान लेते हैं, लेकिन उनके लिए हम सिर्फ एक नाम होते हैं। एकतरफा प्यार इंसान को अंदर से तोड़ देता है। हर छोटी बात दिल को चोट पहुंचाती है। दर्द भरी मोहब्बत शायरी उन एहसासों की आवाज़ है जो अक्सर लोग दुनिया से छुपा लेते हैं।
शायरी 1
तू कभी मेरा था ही नहीं,
फिर भी दिल तुझसे जुदा नहीं,
मैंने हर खुशी तुझ पर वार दी,
मगर तुझे मेरी परवाह नहीं।
शायरी 2
तेरी यादों में रात गुजर जाती है,
हर सांस तुझे पुकारती है,
मोहब्बत अधूरी रह गई मगर,
ये आंखें आज भी तुझे ढूंढती हैं।
शायरी 3
मैंने तुझे अपना खुदा माना,
हर दर्द में तेरा साथ जाना,
मगर तूने मुझे समझा ही नहीं,
और मैंने तुझमें अपना जहां माना।
शायरी 4
दिल तुझसे आज भी प्यार करता है,
हर पल तेरा इंतजार करता है,
मगर तू किसी और में खुश है,
और ये दिल फिर भी तुझ पर मरता है।
शायरी 5
तू सामने होकर भी दूर था,
मेरी मोहब्बत से मजबूर था,
मैंने तुझे दिल से चाहा मगर,
तू किसी और के नशे में चूर था।
शायरी 6
अब हर खुशी अधूरी लगती है,
तेरे बिना जिंदगी सूनी लगती है,
जिसे सबसे ज्यादा चाहा हमने,
वही सबसे ज्यादा दूरी लगती है।
शायरी 7
मैंने तुझे हर दुआ में मांगा,
हर ख्वाब में सिर्फ तुझे देखा,
मगर तू कभी मेरा ना हुआ,
और दिल हर पल अकेला रहा।
शायरी 8
तेरी मुस्कान मेरी जान थी,
तेरी बातें मेरी पहचान थी,
अब सब कुछ अधूरा लगता है,
क्योंकि तू मेरी अधूरी चाहत थी।
शायरी 9
दिल टूटकर भी तुझे चाहता है,
हर दर्द में तेरा नाम आता है,
मोहब्बत शायद इसी को कहते हैं,
जो बिछड़कर भी साथ निभाता है।
शायरी 10
तू मेरी किस्मत में नहीं था,
फिर भी दिल तुझसे जुड़ा था,
एकतरफा प्यार की यही कहानी है,
जिसमें दर्द ही दर्द लिखा था।
