ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब
ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है निगाह दिल से तिरे सुर्मा-सा निकलती है फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वत से बनती है शबनम सबा जो ग़ुंचे के पर्दे में जा...
ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है निगाह दिल से तिरे सुर्मा-सा निकलती है फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वत से बनती है शबनम सबा जो ग़ुंचे के पर्दे में जा...
ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है निगाह दिल से तिरे सुर्मा-सा निकलती है फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वत से बनती है शबनम सबा जो ग़ुंचे के पर्दे में जा...
Follow: