Tag: Sad Shayari

  • जिन्दगी

    जिन्दगी

    जिन्दगी

    मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूँढ लेती है,
    बड़ी शातिर है दुनिया मजा लेने का बहाना ढ़ूँढ लेती है।

    जिन्दगी को हमेशा मुस्कुरा के गुजारो,
    क्योंकि आप नहीं जानते की.. यह कितनी बाकी है।

    अकेले ही काटना है मुझे ऐ जिन्दगी का सफर,
    यूँ पल-दो-पल साथ चलकर मेरी आदत खराब न करो ।

    मुझे पतझड़ की कहानियाँ सुना के उदास न कर ऐ जिंदगी,
    नए मौसम का पता बता.. जो गुजर गया, वो गुजर गया।

    सांसे खर्च हो रही है बीती उम्र का हिसाब नहीं,
    फिर भी जीए जा रहें हैं तुझे, जिंदगी तेरा जवाब नहीं।

    जिंदगी में खत्म होने जैसा कुछ नहीं होता,
    हमेशा एक नई शुरुआत आपका इंतजार करती है!

    हसरतें कुछ और हैं वक्त की इल्तजा कुछ और है कौन जी सका है..
    ज़िन्दगी अपने मुताबिक दिल चाहता कुछ और है होता कुछ और है।

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  • मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​

    मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​

    मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​

    अगर लोग यूँ ही कमियां निकालते रहे तो,
    एक दिन सिर्फ खूबियाँ ही रह जायेगी मुझमें।

    दिखावे की मोहब्बत तो जमाने को है हमसे पर,
    ये दिल तो वहाँ बिकेगा जहाँ ज़ज्बातो की कदर होगी।

    ​मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​,
    ​मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकल के देख​।

    हमको आज़माने की ज़ुर्रत नहीं किसी की,
    हम खुद अपनी तक़दीर लिखते है,
    खुदा की लिखावट को बदलना तो हमारी फ़ितरत है,
    हार को जीत में बदल कर हाथो की लकीर बदलते है!!

    उसे भूल कर जिया तो क्या जिया,
    दम है तो उसे पाकर दिखा,
    लिख पत्थरो पर अपने प्रेम की कहानी,
    और सागर को बोल,
    दम है तो इसे मिटा कर दिखा!!

    अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो,
    मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो,
    मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते क्यों हो,
    मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो।

    कई लोग मुझको गिराने मे लगे है,
    सरे शाम चिराग भुझाने मे लगे है,
    उन से कह दो क़तरा नही मैँ ? समन्द्र हूँ,
    डूब गये वो ख़ुद जो डूबाने मे लगे है!

    गुजरते लम्हों में सदियाँ तलाश करता हूँ,
    प्यास इतनी है कि नदियाँ तलाश करता हूँ,
    यहाँ पर लोग गिनाते है खूबियां अपनी,
    मैं अपने आप में कमियाँ तलाश करता हूँ।

    मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​

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  • ऐ ज़िन्दगी तेरी क्या कीमत है

    ऐ ज़िन्दगी तेरी क्या कीमत है

    ऐ ज़िन्दगी तेरी क्या कीमत है..!!

    सबके कर्जे चुका दू मरने से पहले ऐसी मेरी नीयत है..!
    मौत से पहले तू भी बता दे .. ऐ ज़िन्दगी तेरी क्या कीमत है..!!

    चेहरा तो साफ कर ले, आइने को गंदा बताने वाले..!
    हर वक़्त सामने वाला ही गंदा नहीं होता..!!

    बिखेरे बैठा हूं कमरे में सब कुछ…
    कहीं एक ख्वाब रखा था वो भी कहीं गुम है..! ?

    दोस्तों की जुदाई का गम न करना,
    दूर रहे तो भी मोहब्बत काम न करना,
    अगर मिले ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर,
    तो हमें देखकर आंखें बंद न करना.
    Doston ki judai ka gam na karna,
    Dur rahe to bhi mohabbat kam na karna,
    Agar mile zindagi ke kisi mod par,
    To hame dekhkar ankhein band na karna.

    शायरीयो का बादशाह हूँ और कलम मेरी रानी है,
    अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी है!!
    Shayari ka badshah hoon aur kalam meri raani hai,
    Alfaaz mere gulam hai, baaki rab ki maherabani hai!!

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  • Karz hai tere upar mere sajdo ka

    Karz hai tere upar mere sajdo ka

    Karz hai tere upar mere sajdo ka

    बस इतना ही है मुझको तुमसे कहना..
    बड़े अच्छे हो तुम, ख्याल रखा करो अपना..!!

    कर्ज है तेरे ऊपर मेरे सजदो का..
    मैंने एक अरसे से तुझे खुदा माना है..!! ?
    Karz hai tere upar mere sajdo ka..
    maine ek arse se tujhe khuda maana hai..!!

    सिर्फ ये सोचकर हमने अपनी आस्तीन नहीं झटकी..
    ना जाने कितने सांप और सपोले बेघर हो जाएंगे..!

    ये इनायते गजब की, ये बला की मेहरबानी…
    मेरी खैरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी ..!! ??

    बहुत सीमेंट है साहब आजकल की हवाओं में..
    दिल कब पत्थर बन जाता है पता ही नहीं चलता..!! ??

    इससे भी दर्दनाक मंजर क्या होगा वहां..
    खंजरों की जगह जुबाने बिक रही हो जहां..!! ?

    खामोशी भी अब रास आ गई है..
    ज़िन्दगी इसी बहाने पास आ गई है..!!

    सजा बन जाती है गुज़रे वक़्त की निशानियां..
    ना जाने मतलब के लिए क्यों मेहरबान होते है लोग..!! ???

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  • बिच्छरण

    बिच्छरण

    बिच्छरण

    सदियों सदियों मेरा सफ़र
    मंज़िल मंज़िल राहगुज़र

    संदल से महकती हुई पुर-कैफ़ हवा का
    झोंका कोई टकराए तो लगता है कि तुम हो

    अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
    कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं

    बिच्छरण
    बिच्छरण

    दिल का ये हाल कि धड़के ही चला जाता है
    ऐसा लगता है कोई जुर्म हुआ है मुझ से

    दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज़्बात से हम
    इतने मजबूर रहे हैं कभी हालात से हम

    तुम भी इस दिल को दुखा लो तो कोई बात नहीं
    अपना दिल आप दुखाया है बहुत दिन हम ने

    मैं तुम से दूर रहता हूँ तो मेरे साथ रहती हो
    तुम्हारे पास आता हूँ तो तन्हा हो सा जाता हूँ

    ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
    इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं

    एक भी ख़्वाब न हो जिन में वो आँखें क्या हैं
    इक न इक ख़्वाब तो आँखों में बसाओ यारो

    इंक़िलाबों की घड़ी है
    हर नहीं हाँ से बड़ी है

    बिच्छरण

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  • क्योंकि पुरुष हो तुम।

    क्योंकि पुरुष हो तुम।

    अक्सर सुना है, पुरुषों का समाज है।
    तुम्हारे ही हिसाब से चलता है और,
    तुम्हारी ही बात करता है।
    पर सच शायद थोड़ा अलग है॥

    क्योंकि पुरुष हो तुम।

    देखा है मैंने कितनों को,
    इस पुरुषत्व का बोझ ढोते।
    मन मार कर जीते और,
    चुपचाप आँसुओं का घूंट पीते॥

    हकीक़त की चाबुक से,
    रोज मार खाते सपने।
    रोज़ी रोटी के जुगाड़ से,
    जुड़े सारे अपने।
    रुपयों में तौला जाता व्यक्तित्व,
    व्यवहार से सिर्फ नहीं जुड़ा होता अपनत्व।

    किसी भी अंजान स्त्री को अपलक कुछ पल निहार कर,
    अगले ही पल हिकारत भरी नज़रों का बन जाते हो शिकार।
    कोई सरोकार नहीं किसी को तुम्हारे नज़रिये से,
    कोई नहीं पूछता तुमसे तुम्हारे मन के विचार।

    प्रेम करते हो पर अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाए
    तो कायर हो तुम।
    क्योंकि पुरुष हो तुम।

    टूटकर रोना चाहते हो,
    पर नहीं, तुम रो नहीं सकते,
    रोते तो कमजोर हैं और तुम कमज़ोर नहीं हो सकते।

    तुम्हे नहीं सिखाया जाता ज़िन्दगी को
    सलीके से सहेजने का गुण,
    क्योंकि पुरुष हो तुम।

    स्त्री होना कठिन है तो
    पुरुष होना भी कहाँ आसान है।
    ज़िन्दगी भेदभाव नहीं करती,
    बिना तकलीफों के किसी के संग नहीं चलती।

    प्रतिस्पर्धी नहीं, पूरक हो तुम
    क्योंकि पुरुष हो तुम।

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  • जहां जीवन दौलत के बिन

    जहां जीवन दौलत के बिन

    जहां जीवन दौलत के बिन
    खुश रहता है अति अपार।
    प्रेम का भरा रहता भंडार
    जिसको सब कहते परिवार।।

    मोह लोभ की परछाई भी
    नहीं डाल पाती है यहां डेरा।
    अमावस की काली रात में
    निकलता खुशियों का सवेरा।।


    परिवार इस संपूर्ण जगत का
    उपहार है सबसे अनमोल।
    खाली पेट शीघ्र भर जाता है
    जब कहता कोई प्रेम के बोल।।


    रोटी में बसता मां का प्यार
    भाती हैं नोक झोंक बहन की।
    कोलाहल करते जब लड़ते हैं
    रोनक बढ़ जाती हैं आंगन की।।

    पिता की डांट दिशा दिखाती
    जो प्रेरित करती है आंठो याम।
    परिवार का प्रेम जिसे मिलता है
    बन जाता वह एक दिन कलाम।।


    जैसे चीटियां एकत्रित होकर के
    परिवार का सब बनकर हिस्सा।
    समस्या को हंस के करती परास्त
    नहीं बनती अतीत का किस्सा।।


    परिवार में शामिल भावनाएं
    प्रबल शक्ति करती है प्रदान।
    मानव जिसके माध्यम से
    हरा भरा करता है रेगिस्तान।।


    जिसके पास नहीं होता है
    खुशी से भरे परिवार का मेला।
    वह हजारों की भीड़ में भी
    रहता है जीवन भर अकेला।।


    भयभीत करके शस्त्रों से
    भले मानव बन जाए सिकन्दर।
    जीवन में खुशियों का खज़ाना
    रहता सदैव परिवार के अंदर।।

    जहां जीवन दौलत के बिन

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  • कौन तेरा अपना सा है

    कौन तेरा अपना सा है

    हर पल मुझको एक ही
    ख़याल सता सा जाता है ,
    इस तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी में,
    कौन है जो मेरा अपना सा है ?

    कौन तेरा अपना सा है

    कौन तेरा अपना सा है

    सुबह से लेकर रात तक, सिर्फ
    भागता दौड़ता जो रहता है,
    घर जाते वक़्त दिल सोचता है,
    किस वास्ते तू घर लौटता है ?

    ये थकान ही गर सुकून है तो,
    तू क्यों उदास होता है दिल,
    इसी की है, क्या चाहत तुझे?
    या कुछ और तेरा सपना सा है

    तू है तो बहुत मज़बूत और
    तुझमे में वो जज़्बा अब भी है!
    पर जिन्हे सोचता है दिन रात तू,
    उन मंज़िलों की सीढ़ी बड़ी लम्बी है!

    इस सफर में आएंगे बहुत और,
    बनेंगे ढेरो रिश्ते भी, पर दिल
    ना रखना आशा तू किसी से, क्योकि
    सफर अकेले ही तय करना है!

    जो फिर भी लगे कभी तुझे,
    कि मिल गया है तुझे साथी कोई,
    तो हाथ थामकर पूछना उससे,
    क्या तू ही मेरा अपना सा है?

    ना मिले जवाब भी तो क्या,
    ना रहे जो कोई साथ तो क्या,
    तूने कोशिश तो की, जुड़ जाने की,
    अब देख, कि कौन तन्हा सा है!

    जो तुझे संभाले और सवारे भी,
    तेरे सफर को कर दे आसान जो,
    जिसके साथ करे हसने का मन,
    जो लौटाए तुझे तेरा बचपन,

    जो दे हर हालात में साथ तेरा,
    तेरे वास्ते लड़ जाए, हर किसी से जो
    तेरी हंसी हो जिसकी ख़ुशी कि वजह,
    बस्स्स वही है! जो तेरा अपना सा है!कौन तेरा अपना सा है

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  • मेरी आंखों का तारा ही

    मेरी आंखों का तारा ही

    मेरी आंखों का तारा ही,

    मेरी आंखों का तारा ही, मुझे आंखें दिखाता है.
    जिसे हर एक खुशी दे दी, वो हर गम से मिलाता है.

    जुबा से कुछ कहूं कैसे कहूं किससे कहूं माँ हूं
    सिखाया बोलना जिसको, वो चुप रहना सिखाता है.

    सुला कर सोती थी जिसको वह अब सभर जगाता है.
    सुनाई लोरिया जिसको, वो अब ताने सुनाता है.

    सिखाने में क्या कमी रही मैं यह सोचूं,
    जिसे गिनती सिखाई गलतियां मेरी गिनाता है.

    हम एक शब्द हैं तो वह पूरी भाषा है
    हम कुंठित हैं तो वह एक अभिलाषा है
    बस यही माँ की परिभाषा है.

    हम समुंदर का है तेज तो वह झरनों का निर्मल स्वर है
    हम एक शूल है तो वह सहस्त्र ढाल प्रखर

    हम दुनिया के हैं अंग, वह उसकी अनुक्रमणिका है
    हम पत्थर की हैं संग वह कंचन की कृनीका है

    हम बकवास हैं वह भाषण हैं हम सरकार हैं वह शासन हैं
    हम लव कुश है वह सीता है, हम छंद हैं वह कविता है.

    हम राजा हैं वह राज है, हम मस्तक हैं वह ताज है
    वही सरस्वती का उद्गम है रणचंडी और नासा है.

    हम एक शब्द हैं तो वह पूरी भाषा है.
    बस यही माँ की परिभाषा है.

    मेरी आंखों का तारा ही

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  • बिछड गया कोई हमसे अपना

    बिछड गया कोई हमसे अपना

    बिछड गया …
    बिछड गया कोई हमसे अपना

    करीबी वक्त की मार में
    कोई हो गया अंजान हमसे
    किसमत की इस चाल में

    टूट कर बिखर गये अरमान मेरे
    इस कदर
    फिर टूट गया मेरे इस दिल का भी सबर

    बिछड गया कोई हमसे अपना
    पहली दफह किसी को इतना चाह था मैनें
    उसे फिर अपना खुदा माना था मैंने

    वो मेरे ख्यालों में जीया करता था
    मेरे हर साँस की एक वजह वो भी हुआ करता था

    बिछड गया कोई हमसे अपना

    उसे इज्हार कर हमने अपनी मुहब्बत का इहसास कराया था
    खामौशी में उसने भी फिर प्यार जताया था

    मैं उम्मीदों को जिंदा रख जीने लगा था
    उसके हर दुख को अपना समझ पीने लगा था

    बिछड गया कोई हमसे अपना

    वो दुखी सा होकर हम्हें इंकार करता था
    वजह अंजान थी क्योकि हर बार करता था

    मैं उसे सच्ची मुहब्बत करने लगा
    उसके हाँ के इतजार में जीने लगा

    बिछड गया कोई हमसे अपना

    सब कुछ अच्छा चल रहा था
    उसे भी है अब प्यार एसा लग रहा था

    फिर अचानक इक भवंडर आया
    मेरी जीवन में तूफान ले आया

    बिछड गया कोई हमसे अपना

    उसके अतीत का इक पन्ना आज उसका आज बनकर आया
    मेरे दिल में हलचल मची फिर उसने मुझे बहुत रूलाया

    टूट गया मैं अपनी क़मुहब्बत को संजोता – संजोता इस कदर…
    देख ना सका अपना बुरा भी हर डगर

    बिछड गया कोई हमसे अपना

    फिर उसकी खुशी के लिए फिका सा मैं भी हंस दिया
    हर अरमान मैंने अपना जिंदा दफन फिर मैनें कर लिया

    आज वो दूर है मुझसे ए सच है
    मुझे प्यार आज भी है उस्से ए भी सच है

    उस उपर वाले की मर्जी नें मुझे अलग कर दिया
    वो अलग हुआ पर मुझे पत्थर दिल कर दिया

    बिछड गया कोई हमसे अपना 

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