बिच्छरण

बिच्छरण

बिच्छरण सदियों सदियों मेरा सफ़रमंज़िल मंज़िल राहगुज़र संदल से महकती हुई पुर-कैफ़ हवा काझोंका कोई टकराए तो लगता है कि तुम हो अब ये भी…

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