Tag: dosti shayari

  • तुम्हारा ज़र्फ़ है तुम को मोहब्बत भूल जाती है

    तुम्हारा ज़र्फ़ है तुम को मोहब्बत भूल जाती है

    तुम्हारा ज़र्फ़ है तुम को मोहब्बत भूल जाती है,
    हमें तो जिस ने हँस कर भी पुकारा याद रहता है,
    मोहब्बत में जो डूबा हो उसे साहिल से क्या लेना,
    किसे इस बहर में जा कर किनारा याद रहता है।

  • प्यार नहीं था और ना ही दोस्ती थी

    प्यार नहीं था और ना ही दोस्ती थी

    प्यार नहीं था और ना ही दोस्ती थी
    दोनो को बस आदत थी
    रोज़ सुबह फोन पे बात करना पहले टाईम पास था
    लेकिन अब ज़रूरत थी
    दिन में कभी बात ना हो तो चलता था
    पर अब तो इंतज़ार की घड़ियां खत्म नहीं होती थी
    प्यार नहीं था और ना ही दोस्ती थी
    दोनो को बस आदत थी
    I love you too तो मज़ाक था
    कब इज़हार बन गया पता नहीं
    दोस्ती कब प्यार बन गई पता नहीं
    दोनो के दिलों में प्यार था
    पर दिमाग़ है मानता नहीं
    प्यार नहीं था और ना ही दोस्ती थी
    दोनो को बस आदत थी
    तीन साल बीत गए दोस्ती और प्यार की जंग में
    लड़ाई कब ब्रेक अप में बदल गई पता नही
    दोस्ती ने प्यार को कायम रखा और
    प्यार ने दोस्त को पकड़े रखा
    कब प्यार जीत गया पता नहीं
    ये जय वीरू की जोड़ी
    कब राधा कृष्ण बन गई पता नहीं
    प्यार नहीं था और ना ही दोस्ती थी
    दोनो को बस आदत थी
    दोस्ती के वादे अब साथ रहने की कसमें हैं
    प्यार के पौधे में दोस्ती की जड़ें हैं
    जो कभी आपस में लड़ते थे अब अपने प्यार के लिए लड़ेंगे
    डरते थे जो अब इनसे डरेंगे
    दोस्ती की नीव पर प्यार का घर है
    बिछड़ना इनका शायद ही मुमकिन है
    प्यार नहीं था और ना ही दोस्ती थी
    दोनो को बस आदत थी |

  • Dost Kahu Ya Yaar Kahu, Ya Sabse Pehla Payar Kahu

    Dost Kahu Ya Yaar Kahu, Ya Sabse Pehla Payar Kahu

    Dost kahu ya yaar kahu, ya sabse pehla payar kahu..!

    Tu hai to lagta hai jyse, sab pe mai aitbar karu..!!

    Tu paas na ho to darr lagta hai, Tere na hone se fark dikhta hai..!

    Aik teri bas yaari sachi, baki dunya me sab bikta hai..!!

    Tu moti meri aankho ka, tu meri muskan hai..!

    Aik tu hi to sang hai mere, duja ye iman hai..!!

  • Farak ilm ka nhi bas nazarea ka hai, Nazarya Shi Ho To Dushman Bhi Dost Hojae..!

    Farak ilm ka nhi bas nazarea ka hai, Nazarya Shi Ho To Dushman Bhi Dost Hojae..!

    Farak ilm ka nhi bas nazarea ka hai sahab..! Nazarya Shi ho to dushman bhi dost hojae..!! Hasad dil me ho to hunar bhi aib lagta hai .! Thoda shafqat se dekho to aib bhi hunar hojae..!!

    Ahista ahista kadmo me mere, ye sakht zameen jannat hojae..! Maa ki mamta hai hi aisi ki ye bikhri kismat bhi sidhi lakeer hojae..!!

  • Door Kitna Bhi Jao

    Door Kitna Bhi Jao

    Door kitna bhi jao, apne gam ko bhula na paoge,
    Apne hi gam mein tinke ki tarah bikhar jaoge,
    Dost kehte ho, to maan bhi lo dil se mere yaar,
    Ek hum hi hai jiske pas laut ke vapas aaoge.