Tag: हो गई है ग़ैर की शीरीं-बयानी कारगर

  • हो गई है ग़ैर की शीरीं-बयानी कारगर | मिर्ज़ा ग़ालिब

    हो गई है ग़ैर की शीरीं-बयानी कारगर | मिर्ज़ा ग़ालिब

    हो गई है ग़ैर की शीरीं-बयानी कारगर | मिर्ज़ा ग़ालिब

    हो गई है ग़ैर की शीरीं-बयानी कारगर

    इश्क़ का उस को गुमाँ हम बे-ज़बानों पर नहीं

    ज़ब्त से मतलब ब-जुज़ वारस्तगी दीगर नहीं

    दामन-ए-तिमसाल आब-ए-आइना से तर नहीं

    बाइस-ए-ईज़ा है बरहम-ख़ुर्दन-ए-बज़्म-ए-सुरूर

    लख़्त लख़्त-ए-शीशा-ए-ब-शिकास्ता जुज़ निश्तर नहीं

    दिल को इज़्हार-ए-सुख़न अंदाज़-ए-फ़तह-उल-बाब है

    याँ सरीर-ए-ख़ामा ग़ैर-अज़-इस्तिकाक-ए-दर नहीं

    हो गई है ग़ैर की शीरीं-बयानी कारगर | मिर्ज़ा ग़ालिब