Tag: हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम

  • आप की याद आती रही

    आप की याद आती रही

    आप की याद आती रही रात भर’ 

    चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर 

    गाह जलती हुई गाह बुझती हुई 

    शम-ए-ग़म झिलमिलाती रही रात भर 

    कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन 

    कोई तस्वीर गाती रही रात भर 

    फिर सबा साया-ए-शाख़-ए-गुल के तले 

    कोई क़िस्सा सुनाती रही रात भर 

    जो न आया उसे कोई ज़ंजीर-ए-दर 

    हर सदा पर बुलाती रही रात भर 

    एक उम्मीद से दिल बहलता रहा 

    इक तमन्ना सताती रही रात भर

    • फ़ैज़ अहमद फ़ैज़