Tag: लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले

  • लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले |  मिर्ज़ा ग़ालिब

    लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले | मिर्ज़ा ग़ालिब

    लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले | मिर्ज़ा ग़ालिब

     

    लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले

    ‘ग़ालिब’ ये ख़ौफ़ है कि कहाँ से अदा करूँ

     

    ख़ुश वहशते कि अर्ज़-ए-जुनून-ए-फ़ना करूँ

    जूँ गर्द-ए-राह जामा-ए-हस्ती क़बा करूँ

     

    आ ऐ बहार-ए-नाज़ कि तेरे ख़िराम से

    दस्तार गर्द-ए-शाख़-ए-गुल-ए-नक़्श-ए-पा करूँ

     

    ख़ुश ऊफ़्तादगी कि ब-सहरा-ए-इन्तिज़ार

    जूँ जादा गर्द-ए-रह से निगह सुर्मा-सा करूँ

     

    सब्र और ये अदा कि दिल आवे असीर-ए-चाक

    दर्द और ये कमीं कि रह-ए-नाला वा करूँ

     

    वो बे-दिमाग़-ए-मिन्नत-ए-इक़बाल हूँ कि मैं

    वहशत ब-दाग़-ए-साया-ए-बाल-ए-हुमा करूँ

     

    वो इल्तिमास-ए-लज्ज़त-ए-बे-दाद हूँ कि मैं

    तेग़-ए-सितम को पुश्त-ए-ख़म-ए-इल्तिजा करूँ

     

    वो राज़-ए-नाला हूँ कि ब-शरह-ए-निगाह-ए-इज्ज़

    अफ़्शाँ ग़ुबार-ए-सुर्मा से फ़र्द-ए-सदा करूँ

     

    लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले | मिर्ज़ा ग़ालिब