फ़ारिग़ मुझे न जान कि मानिंद-ए-सुब्ह-ओ-मेहर | मिर्ज़ा ग़ालिब फ़ारिग़ मुझे न जान कि मानिंद-ए-सुब्ह-ओ-मेहर है दाग़-ए-इश्क़ ज़ीनत-ए-जेब-ए-कफ़न हुनूज़ है नाज़-ए-मुफ़्लिसाँ ज़र-ए-अज़-दस्त-रफ़्त...
फ़ारिग़ मुझे न जान कि मानिंद-ए-सुब्ह-ओ-मेहर | मिर्ज़ा ग़ालिब फ़ारिग़ मुझे न जान कि मानिंद-ए-सुब्ह-ओ-मेहर है दाग़-ए-इश्क़ ज़ीनत-ए-जेब-ए-कफ़न हुनूज़ है नाज़-ए-मुफ़्लिसाँ ज़र-ए-अज़-दस्त-रफ़्त...