Tag: दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना

  • दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना

    बारे अपनी बेकसी की हम ने पाई दाद याँ

     

    हैं ज़वाल-आमादा अज्ज़ा आफ़रीनश के तमाम

    महर-ए-गर्दूं है चराग़-ए-रहगुज़ार-ए-बाद याँ

     

    है तरह्हुम-आफ़रीं आराइश-ए-बे-दाद याँ

    अश्क-ए-चश्म-ए-दाम है हर दाना-ए-सय्याद याँ

     

    है गुदाज़-ए-मोम अंदाज़-ए-चकीदन-हा-ए-ख़ूँ

    नीश-ए-ज़ंबूर-ए-असल है नश्तर-ए-फ़स्साद या

     

    ना-गवारा है हमें एहसान-ए-साहब-दाैलताँ

    है ज़र-ए-गुल भी नज़र में जौहर-ए-फ़ौलाद याँ

     

    जुम्बिश-ए-दिल से हुए हैं उक़्दा-हा-ए-कार वा

    कम-तरीं मज़दूर-ए-संगीं-दस्त है फ़रहाद याँ

     

    क़तरा-हा-ए-ख़ून-ए-बिस्मिल ज़ेब-ए-दामाँ हैं ‘असद’

    है तमाशा करदनी गुल-चीनी-ए-जल्लाद याँ

    दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठना | मिर्ज़ा ग़ालिब