Tag: ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है

  • ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है

    निगाह दिल से तिरे सुर्मा-सा निकलती है

    फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वत से बनती है शबनम

    सबा जो ग़ुंचे के पर्दे में जा निकलती है

    पूछ सीना-ए-आशिक़ से आब-ए-तेग़-ए-निगाह

    कि ज़ख्म-ए-रौज़न-ए-दर से हवा निकलती है

    ब-रंग-ए-शीशा हूँ यक-गोश-ए-दिल-ए-ख़ाली

    कभी परी मिरी ख़ल्वत में निकलती है

    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब

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    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब

    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है

    निगाह दिल से तिरे सुर्मा-सा निकलती है

    फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वत से बनती है शबनम

    सबा जो ग़ुंचे के पर्दे में जा निकलती है

    पूछ सीना-ए-आशिक़ से आब-ए-तेग़-ए-निगाह

    कि ज़ख्म-ए-रौज़न-ए-दर से हवा निकलती है

    ब-रंग-ए-शीशा हूँ यक-गोश-ए-दिल-ए-ख़ाली

    कभी परी मिरी ख़ल्वत में निकलती है

    ख़मोशियों में तमाशा अदा निकलती है | मिर्ज़ा ग़ालिब