लहरों को खामोश देखकर यह न समझना

लहरों को खामोश देखकर यह न समझना

लहरों को खामोश देखकर यह न समझना
कि समुन्दर में रवानी नहीं है
हम जब भी उठेंगे तूफ़ान बनकर उठेंगे
बस उठने की अभी ठानी नहीं है

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *