द्वारिकाधीश कह गए पार्थ से
द्वारिकाधीश कह गए पार्थ से एक दिन ऐसा कलयुग आएगा दूध और माखन किसी को न भायेगा इंसान मैगी चौमिन पिज़्ज़ा खायगा
द्वारिकाधीश कह गए पार्थ से एक दिन ऐसा कलयुग आएगा दूध और माखन किसी को न भायेगा इंसान मैगी चौमिन पिज़्ज़ा खायगा
एक अधूरी ख्वाहिश है मेरी काश वो भी पूरी हो जाये ऐ खुदा कुछ ऐसा कर कि हमारे विना उनकी हर ख्वाहिश अधूरी हो जाये
बाबुल तेरी बगिया की ये चहचहाती हुयी चिड़िया ना जाने कब उड़ जाये छोड़कर तेरी यह बगिया ना जाने कब बन जाये दुल्हन, यह छोटी सी गुड़िया
दीप तो आंधी में बुझ जाया करते है तारे तो बारिश में छुप जाया करते है फूल तो रात में मुरझाया करते है कितने खुशनसीब होते है वो लोग जिनके पास हर दर्द बांटने...
हर सुबह एक नयी जिंदगी दे आपके दिन का हर लम्हा हर पल ख़ुशी दे आपको जहा गम की छाया छू भी ना पाये खुदा वो जन्नत दे आपको
कभी किसी के रंग को मत देखो उसकी सोच को देखो क्योकि अगर सफ़ेद रंग में वफ़ा होती तो नमक हर जख्म की दवा होती
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