Category: Ghazals

  • आप की याद आती रही

    आप की याद आती रही

    आप की याद आती रही रात भर’ 

    चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर 

    गाह जलती हुई गाह बुझती हुई 

    शम-ए-ग़म झिलमिलाती रही रात भर 

    कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन 

    कोई तस्वीर गाती रही रात भर 

    फिर सबा साया-ए-शाख़-ए-गुल के तले 

    कोई क़िस्सा सुनाती रही रात भर 

    जो न आया उसे कोई ज़ंजीर-ए-दर 

    हर सदा पर बुलाती रही रात भर 

    एक उम्मीद से दिल बहलता रहा 

    इक तमन्ना सताती रही रात भर

    • फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
  • कभी ख़ुद पे कभी हालात पे

    कभी ख़ुद पे कभी हालात पे

    कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया 

    बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया 

    हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को 

    क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया 

    किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं 

    बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया 

    कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त 

    सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया 

    – साहिर लुधियानवी

  • ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे

    ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे

    ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे

    ज़िन्दगी तेरे आस-पास रहे

    चाँद इन बदलियों से निकलेगा

    कोई आयेगा दिल को आस रहे

    हम मुहब्बत के फूल हैं शायद

    कोई काँटा भी आस-पास रहे

    मेरे सीने में इस तरह से बस जा

    मेरी सांसों में तेरी बास रहे

    आज हम सब के साथ ख़ूब हँसे

    और फिर देर तक उदास रहे

    दोनों इक दूसरे का मुंह देखें

    आईना आईने के पास रहे

    जब भी कसने लगा उतार दिया

    इस बदन पर कई लिबास रहे

    • बशीर बद्र